स्वतंत्र भारत का स्वतंत्र साहित्य
आजादी का जश्न
भारत भूमि आजादी के लिए
हंसते-हंसते फांसी के फंदे पर चढ़ गए
भारत के नौजवानों के
बलिदान का प्रतिफल
आज आजादी का जश्न है
वीरों के रक्त से भीगी मेरी धरती मांँ
उसकी गोद में शहीद हुए
नौजवानों को देखकर
दुःख से अश्क बहा करती थी
मुझे मारो मुझे मारो
आकाश की तरह गरजने वाले
वे बम बारूद और बंदूक से
कभी नहीं डरते थे
मेरे देश की संस्कृति,
संपदाओं को छिन्नबीना किया
फिर भी मेरे देश की कीर्ति
विश्व के शिखर पर झूम रही है
भिन्न विभिन्न भाषाएं और जाती
वही हमारी एकता की पहचान है
वही हमारी ताकत है
इसीलिए मेरा देश आजादी का जश्न मना रहा है।
उटनूर
जिला आदिलाबाद
तेलंगाना
94908 82262
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