Tuesday, January 11

हिंदी का यश - श्रीमति तुरुमेल्ला कल्याणी (स्वतंत्र भारत का स्वतंत्र साहित्य)

स्वतंत्र भारत का स्वतंत्र साहित्य



हिंदी का यश


कालचक्र की परिभ्रमण की क्रीडा में,

परम पवित्र पावन देश की गोद में ।


बहुभाषा से भूषित भारतमाता की कृपा से,

जनी है हिंदी बहन संस्कृत की देन से ।


हिंदी के वर्ण है अमृत तुल्य- बहुमूल्य ।


हिंदी की पवित्रता से न टिक सककर गंगाजल,

बंद किया अपने आप को कलशों में ।


इस भाषा सौंदर्य से शरमाकर मोती,

छिपालिये अपने मुख को सीपों में ।


हिंदी यशोगंध से सर्वोपरि साबित करने हेतु ,

हार चुकी है चंदन की लकड़ी करके लाखो प्रयास ।


जो लिखा जाता है वही पढा जाता यही है इसकी खूबी,

स्वतंत्रता संग्राम में देश एकता के सूत्र में बांधकर दिलायी है कामयाबी ।


हिंदी न केवल राजभाषा बल्कि 

सबकी मनकी आशा ।


जानना है हर नागरिक हिंदी का उद्भव व विकास,

बढाना है भारतीय होने के नाते इसके प्रति प्रेम व विश्वास ।


हिंदी की सेवा में जुटी है कई संस्थान ।

कर रहे है विश्वभर में हिंदी का प्रचलन ।


मेरी आशा है के होवें इस अमृतमयी भाषा का उन्नयन ।

माँ रूपी भाषा को प्यार कर के करना है हमें नियमों का पालन ।


भाषा की उन्नति हेतु श्रम  करनेवाले 

महान लोगों को मेरी कलम से कोटि कोटि नमन ।


श्रीमति तुरुमेल्ला कल्याणी

( एम.ए., हिंदी पंडित , बी.एल.ऐ.एस.सी)

१.हिंदी अध्यापिका ( सिंगरेणी कॉलरीज़ उच्च पाठशाला , कोत्तगूडेम्)

२. रेडियो उद्घोषक (आकाशवाणी कोत्तगूडिम् केंद्र)

 कोत्तगूडम्

भद्राद्रि कोत्तगूडेम् (जिला) तेलंगाणा( राज्य)

पिन -५०७१०१

चरवाणी -8317524961

8977018592


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स्वतंत्र भारत का स्वतंत्र साहित्य
Editor
Prasadarao Jami

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