स्वतंत्र भारत का स्वतंत्र साहित्य
हिंदी का यश
कालचक्र की परिभ्रमण की क्रीडा में,
परम पवित्र पावन देश की गोद में ।
बहुभाषा से भूषित भारतमाता की कृपा से,
जनी है हिंदी बहन संस्कृत की देन से ।
हिंदी के वर्ण है अमृत तुल्य- बहुमूल्य ।
हिंदी की पवित्रता से न टिक सककर गंगाजल,
बंद किया अपने आप को कलशों में ।
इस भाषा सौंदर्य से शरमाकर मोती,
छिपालिये अपने मुख को सीपों में ।
हिंदी यशोगंध से सर्वोपरि साबित करने हेतु ,
हार चुकी है चंदन की लकड़ी करके लाखो प्रयास ।
जो लिखा जाता है वही पढा जाता यही है इसकी खूबी,
स्वतंत्रता संग्राम में देश एकता के सूत्र में बांधकर दिलायी है कामयाबी ।
हिंदी न केवल राजभाषा बल्कि
सबकी मनकी आशा ।
जानना है हर नागरिक हिंदी का उद्भव व विकास,
बढाना है भारतीय होने के नाते इसके प्रति प्रेम व विश्वास ।
हिंदी की सेवा में जुटी है कई संस्थान ।
कर रहे है विश्वभर में हिंदी का प्रचलन ।
मेरी आशा है के होवें इस अमृतमयी भाषा का उन्नयन ।
माँ रूपी भाषा को प्यार कर के करना है हमें नियमों का पालन ।
भाषा की उन्नति हेतु श्रम करनेवाले
महान लोगों को मेरी कलम से कोटि कोटि नमन ।
( एम.ए., हिंदी पंडित , बी.एल.ऐ.एस.सी)
१.हिंदी अध्यापिका ( सिंगरेणी कॉलरीज़ उच्च पाठशाला , कोत्तगूडेम्)
२. रेडियो उद्घोषक (आकाशवाणी कोत्तगूडिम् केंद्र)
कोत्तगूडम्
भद्राद्रि कोत्तगूडेम् (जिला) तेलंगाणा( राज्य)
पिन -५०७१०१
चरवाणी -8317524961
8977018592
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