स्वतंत्र भारत का स्वतंत्र साहित्य
हिन्दी है मेरी जिंदगी
हिन्दी है मेरी जिंदगी
करनी है इसकी बंदगी।।
माँ ने दिया मुझे जीवन,पिता ने डाला मुझ मे जान।
हिन्दी ने दिया मुझे सार्थक जीवन का ज्ञान
हिन्दी ने बढाया मुझमें लोकज्ञान।
प्यार मिला हजारों बच्चों का
प्रोत्साहन मिला सैंकडों अध्यापकों का
आशीर्वाद मिला बडे बुजुर्गों का
अपार स्नेह मिला प्यारे मित्रों का।
हिन्दी का हर अक्षर है अनमोल
अनमोल अक्षरों की माला बनाऊँ
यही है अब मेरा जीवन का मोल।
हिन्दी है महान साहित्य सागर
जिसमें हैं भरमार भक्ति
नैतिकमूल्य एवं अपनी संस्कृति की
अनगिनत मोती और सीपी।
अब मेरे अभूषण सोना चाँदी या हीरे नहीं।
मोती सीपी से भरा हिन्दी साहित्य सागर है।
सेवा करू मैं इसकी जब तक है जान
यही है मन्नत मेरी बढाऊँ हिन्दी की शान।
हिन्दी है मेरी जिंदगी
करनी है इसकी बंदगी।
वै. शारदा
हिन्दी अध्यापिका
रंगारेड्डी
फोन नं:9491484099
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Very good madum Achcha Kavaitri bano all the best
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