Monday, January 10

आजादी का अमृत महोत्सव - अरवपल्लि सुब्रह्मण्यम (स्वतंत्र भारत का स्वतंत्र साहित्य)

स्वतंत्र भारत का स्वतंत्र साहित्य



आजादी का अमृत महोत्सव

माँ भारत की अमृत - सन्तान 
बने सदा दायित्व- अजरामर बन-चिरन्तन से
परम वैभव माँ - जब जगद्गुरु  - कल्याणदायिनी 
त्रस्त रही तब मुष्कर शक्ति  - विकृत विष संस्कृति 
सन् सत्तावन पूर्व से - पूर्ण परिवर्तित दिशाएँ
तन-मन-जीवन बलिकर- चरण-चारण
अलक्ष्यित उम्र - वीरवर हिन्दुस्तान के 
धीवर सहित - पथ - महामृत्यु के - पुष्प-शीर्ष-से 
खंडित हुई सोने की चिड़िया 
अखंडित चिर-नव माँ भारत बन
संविधान  मम गण-विधान है 
रहती जनता जन्नत - सुख से 
मिटी नहीं विवक्षा अब भी - वर्ग-कर्म धर्म की
बनी दुर्व्ययता - अमृत आजादी की 
पर, कहती शक्ति  तेरी - 'सृजाम्यहम'
भूखे तो नहीं वे - मदचूर्ण कुपुत्रों पर
जगे चेतना -  द्यौत विमल-सी
छटे तम - भानूदय सुस्वर में 
राम - कृष्ण  - नौ-दस अवतारों  के
रहे प्रज्जवल ' आजादी अमृत-महोत्सव 
************

गद्य लेख
स्वतंत्र भारती ! तेरा अमृत-महोत्सव 
**********
            माँ भारती, मैं तेरा पुत्र, तेरे चरणों में चंद बातें सुनाता चाहता हूँ, मुझे सांत्वना दो। जंबू द्वीप के - भरत वर्ष के - भरत खंड की सनातनी माँ ! अगणित तेरी उम्र, रही बात सही, आज हम आजादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं,  और तेरे उत्सव सदा मनाते रहेंगे। 
        कया माते, तेरी सन्तान-परम्परा सब मातृ-आदर्शों से चल रहे हैं? विश्वव्यापी तुम्हारी संस्कृति पाकर धरा-मंडल से आए योग्य - अयोग्यों को अपनी गोद में पनपाती हुई तू वैश्विक भावनाओं का केन्द्र बनकर विराजमान हो गई हैं। 
           युगांतरों की ॠषि-संस्कृति योग- भूमि से हटकर - आज 'भोग-भूमि' बनती जा रही है। राक्षसी भावनाओं से जीनेवालें अन्यों को जीने नहीं दे रहे हैं। धर्म  - अर्थ - विज्ञान  - संस्कृति  - राजनीति - अन्य सभी क्षेत्रों में  उथल-पुतलों से जीर्ण-शीर्ण न होकर - सद्धर्म वीर बनकर परम वैभव 
प्राप्ति के लिए  अग्रसर तुम्हारी प्रजा को आशीष दें माँ! माँ भारती तेरी जय!
            तेरी जनता की विजय हो ।
**********


अरवपल्लि सुब्रह्मण्यम
94404 11303

-------------------------------------------------------------------------------------------------------

If you like this Writing and want to read more... Then Follow Us
or call
9849250784
for Printed Book
स्वतंत्र भारत का स्वतंत्र साहित्य
Editor
Prasadarao Jami

-----------------------------------------------------------------------------------------------------


scan to see on youtube



scan to join on WhatsApp




BOOK PUBLISHED BY :

GEETA PRAKASHAN

INDIA

Cell 98492 50784

geetaprakashan7@gmail.com

---------------------------------------------------------------------------------

do you want to publish your writing through our BLOGPAGE ?

Please call us 62818 22363

No comments:

Post a Comment

एहसास की खुशबू - सोहन ‘समीं‘ (Geeta Prakashan Bookswala's Anthology "निवेश अक्षरों का")

    (Geeta Prakashan Bookswala's Anthology "निवेश अक्षरों का")     एहसास की खुशबू  💐.......................................💐...