स्वतंत्र भारत का स्वतंत्र साहित्य
आजादी का अमृत महोत्सव
आया - आया आजादी का अमृत महोत्सव ।
लाया - लाया राष्ट्रीय चेतना का पर्व महोत्सव ।।
है, हर भारतवासी का मन हर्षोल्लासित
नई प्रेरणा , नई उमंग हो रही है विकसित ।
आया - आया आजादी का अमृत महोत्सव । छटा अंधकार मिटा अज्ञान का अहंकार ।।
विश्व धरा पर फिर से चमका ज्ञान का दिवाकर शत्रुओं की श्रृंखलाओं को क्षत-विक्षत कर।।
आया - आया आजादी का अमृत महोत्सव ।
याद करो उन वीर पुरुषों के जीवन को ।।
देश के लिए न्योछावर किया तुच्छ जीवन को हंस कर बिता दिया कालापानी जीवन को ।।
आया -आया आजादी का अमृत महोत्सव।
क्या ?आज़ादी की कीमत है ,क्या है परिभाषा।।
पाश्चात्य मोह में पड कर छोड़ दी देश की अभिलाषा ।
प्रेम मोह में ना खोना इस अमूल्य वरदान को।।
आया- आया आजादी का अमृत महोत्सव ।
विश्व पटल पर फिर से हुआ एक चेहरा उद्भव ठानी उसने भारत को विश्व गुरु बनाने की
है, अथक प्रयास उस महान जीवन की ।
आया आया आजादी का अमृत महोत्सव।।
डी शंकर
गीतम विश्व विद्यालय,
हैदराबाद,
फोन ने 9059301806
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