Tuesday, January 11

आजादी का अमृत महोत्सव - डी शंकर (स्वतंत्र भारत का स्वतंत्र साहित्य)

स्वतंत्र भारत का स्वतंत्र साहित्य



आजादी का अमृत महोत्सव


आया - आया आजादी का अमृत महोत्सव ।

 लाया - लाया राष्ट्रीय चेतना का पर्व महोत्सव ।।


 है, हर भारतवासी का मन हर्षोल्लासित 

नई प्रेरणा , नई  उमंग हो रही है विकसित ।


आया -  आया आजादी का अमृत महोत्सव । छटा अंधकार मिटा अज्ञान का अहंकार ।।

विश्व  धरा पर फिर से चमका ज्ञान का दिवाकर शत्रुओं की श्रृंखलाओं को क्षत-विक्षत कर।।


आया - आया आजादी का अमृत महोत्सव ।

याद करो उन वीर पुरुषों के जीवन को ।।

 देश के लिए न्योछावर किया तुच्छ जीवन को हंस कर बिता दिया कालापानी जीवन को ।।


आया -आया आजादी का अमृत महोत्सव।

 क्या ?आज़ादी की कीमत है ,क्या है परिभाषा।। 

पाश्चात्य मोह में पड कर छोड़ दी देश की अभिलाषा ।

प्रेम मोह में ना खोना इस अमूल्य वरदान को।।


आया- आया आजादी का अमृत महोत्सव ।

विश्व पटल पर फिर से हुआ एक चेहरा उद्भव ठानी उसने भारत को विश्व गुरु बनाने की

 है, अथक प्रयास उस महान जीवन की ।

आया आया आजादी का अमृत महोत्सव।।


डी शंकर

गीतम विश्व विद्यालय,  

हैदराबाद, 

फोन ने 9059301806


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स्वतंत्र भारत का स्वतंत्र साहित्य
Editor
Prasadarao Jami

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