स्वतंत्र भारत का स्वतंत्र साहित्य
गुलामी की हथकडियों से स्वतंत्रता की ओर...
जब जन्म लेते है तो किसी के हाथों में गुलामी की हथकडियां नहीं रहती....
पर अब यहां हथकडियां कहा से आ गये..
मनमरजी से जीने केलिए
मनमरजी से सोचने केलिए-बिना अवकाश के ही जीवन समाप्त हो जाता हैं..
यहां तक की मूल रूप से आजादी के बारे में जानने केलिए,सोचने केलिए भी छूट नहीं रहती...
कल्पना के सहारे आकाश में उडने का भी डर है हमें..
बाप रे ! आजादी! हमें नहीं चाहिए!
ख्वाबों में भी आाजादी के भारे में नहीं सोचना!
अपने माता-पिता ने पहनाये सो हथकडियां..
अपने वेद,उपनिषद,इतिहास,पौराणिक चरित्रों की हथकडियां..
अपने अतुलित भय ने पहनाये सो हथकडियां..
अपने खुद की लापरवाई से पहनाये गए हथकडियां..
आधुनिक प्रौद्योगिकी ने पहनाये सो हथकडियां..
महान लगाव से भरा मानसिक हथकडियां..
सही मॆं भारत वासियों को इस तरह एक गुलामी का जीवन जीना आदत पडगई थी.. इस तरह अग्रेजों के भारत पर कब्जे के बाद हम अपने ही देश में गुलाम थे. पहले सब कुछ हमारा था जैैसे कि धन, अनाज, जमीन परंतु अग्रेजों के आने के बाद किसी चीज पर हमारा अधिकार नहीं था.वे अपने मनमरजी से लगान वसूलते थे.तब तक हमें एहसास हो चुका था कि हम गुलाम बन चुके हैं,हम सीधे अंग्रेज शासन अधिकारियों के अधीन थे.शुरू शुरू में अंग्रेजों ने हमॆं शिक्षित करने या हमारे विकास के नाम पर अपनी चीजे थोपना शुरू की,इस तरह वे हम पर शासन करने लगे.
अंग्रेजॊं ने हमें शारीरिक,मानसिक हर तरफ से प्रताडित किया.इस कारण कई युद्द भी हुए, जिसमें सबसे प्रमुख था द्वितीय विश्व युद्द, जिसके लिए भारतीय की सेना में अनेक भर्तियां की गयी.अंग्रेजों ने जलियांवाला बाग जैसे नर संहार को भी अंजाम दिया और भारतीय केवल उनके दास मात्र बन के रह गए थॆ.
15 अगस्त 1947 एक ऐसी तिथी है जिसे हमारे इतिहास में सुनहरे अक्षरों से लिखा गया है.एक ऐसा दिन जब अंग्रेज भारत छोडने पर मजबूर हो गये थे. हमें दो सौ साल कि गुलामी से आजादी मिली थी,15 अगस्त 1947, स्वतंत्रता प्रप्ति के बाद जवाहर लाल नेहरु भारत के प्रथम प्रथम प्रधानमंत्री बने,जिन्होंने उसी दिन मध्यरात्रि को अपने भाषण "ट्रिस्ट वीद डेस्टिनी" के साथ पंडित जवाहर लाल नेहरू ने भारत की आजादी की घोषणा की.साथ ही उन्होंने अपने भाषण में कहा कि, वर्षों की गुलामी के बाद ये वह समय है जब हम अपना संकल्प निभाएंगे और अपने दुर्भाग्य का अंत करेंगे.
15 अगस्त के इस पर्व दिन को सभी भारतीय अपने अपने तरीके से मनाते हैं कोई मित्रों और परिवारों के साथ यादगार बनाता हैं तो कोई देश भक्ति गानों और फिल्में देख झूमता है.साथ ही राष्ट्रीय गौरव के इस पर्व को भारत सरकार द्वारा बहुत ही धूमधाम से दिल्ली के लाल किले पर झंडा फहराया जाता है और उसके बाद इस उत्सव को और खास बनाने के लिए भारतीय सेनाओं द्वारा परेड़ और राष्ट्र गान की धुन के साथ पूरा वातावरण देशभक्ति से पुलकित हो उठते हैं.
हमारे स्वतंत्रता सेनानी जैसे गांधी जी, जिनका आजादी के लिए संघर्ष में अतुल्य योगदान रहा है और वे सबसे लोकप्रिय भी थे.उन्होंने सबको सत्य,अहिंसा का पाठ पढाया और वह अहिंसा ही था, जो सबसे बडे़ हथियार के रूप में उभरा और कमजोर से कमजोर व्यक्ति के जीवन में भी उम्मीद के दीपक जलाए.आजादी की इस लड़ाई में सैकडों ऐसे नाम हैं जैसे,सुभाष चन्द्र बोस,मंगल पांड़े,रानी लक्ष्मी बाई,बाल गंगाधर तिलक, बाबू राजेंद्र प्रसाद, मौलाना अबुल कलाम आजाद आादि जिनके योगदान अतुलनीय हैं.
डाॅ. जटावत श्रीनिवास राव
हिंदी सेवी
तेनाली, जिला गुंटूर
मोबाइली: 6281276669
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Editor
Prasadarao Jami
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