स्वतंत्र भारत का स्वतंत्र साहित्य
मेरी माँ
मां का प्यार ममता का भंडार,
रोते हुए शिशु को चुप करानेवाली है मां,
चलते चलते गिरने वाले शिशु को,
अपने हाथों से संभालने वाली है मां,
रेंगते हुए शिशु की घुटनों की रक्षा है मां,
बिना पूछे हीभूख मिटानेवाली अन्नपूर्णा है मां।।
पढ़ाई लिखाई में आगे बढ़ाने वाली सरस्वती है मां,
मुश्किलों का सामना कराने की हिम्मत है मां,
हमारे सपनों को अपनी मेहनत से,
पूरा करनेवाली विदूषी है मां,
यौवन में हम राह भटक न जाए,
दीप दिखाने वाली मार्गदर्शक है मां।।
प्रौढ़ावस्था में हमारे गलतियों को माफ करने वाली है मां,
हम कमाए या ना कमाए फिर भी गले से लगाने वाली है मां,
जीवन में हम से भी ज्यादा हम पर,
भरपूर विश्वास रखनेवाली प्यारी है मां,
सफलता की कुंजी कैसे भी हो,
मेहनत करके हमारी भूख मिटानेवाली है मां।।
बुढ़ापे में भी अपनी घुटनोंकी दर्द छुपाकर,
बच्चों के पैरों में दवा लगानेवाली है मां,
अपनी कमजोरी को भुलाकर थाली में,
खाना रखकर हाथों से खिलाने वाली है मां,
जलती हुई मोम की तरह आखिरी सांस तक,
हमारी हाथों को संभालनेवाली है मां।।
बोब्बूरी स्वप्ना
कवयित्री एवं शिक्षिका
जड पी हेच कूकटपल्ली
हैदराबाद
9908322293
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