स्वतंत्र भारत का स्वतंत्र साहित्य
भारत की गरिमा
सुनो-सुनो साथी रे, बोलना है हिंदी में,
भारत की गरिमा है, जिसे हम जानना है।
गाँधीजी की आत्मा है, स्वतंत्रता की जान है,
यही अंग्रेजों को ललकारा है, यही देश प्रेम को जगाया है।
यही देश की शोभा है, यही सबकी आशा है।
भारत की एकता है, जिसे हम सीखना है।
संस्कृत से जनमा है, समुंदरसा कोश है,
यही देश को जोडती है, यही भारतीयों की धड़कन है।
यही विश्व भाषा है, यही सर्वग्राही है।
जो लिखा जाता है, वही पढ़ा जाता है,
भारत की संस्कृति है, जिसे हम अपनाना है।
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