Friday, January 14

मां... - दिनेश कमलेकर "विनीत" (स्वतंत्र भारत का स्वतंत्र साहित्य)

स्वतंत्र भारत का स्वतंत्र साहित्य



मां...

मां के बिना , मेरा कोई वजूद नहीं..
मां के बिना, तुम्हारा कोई अस्तित्व नहीं..

मां से बढ़कर हर किसी को ,कोई देवी नहीं..

मां की कोख के समान , कोई तीर्थ नहीं..


हर दिन मां की मान रखें ,
तो मातृ दिवस की जरूरत नहीं..

मां ममता की मूर्ति है ,
मही में इससे बड़ी स्फूर्ति नहीं..

हर घर मां का सेवाश्रम हो ,
तो वृद्धाश्रम की जरूरत नहीं..

हर पल मां ने समर्पण की है ,
इस से बढ़कर आशीर्वाद संभव नहीं..


दिनेश कमलेकर  "विनीत"
   हिंदी अध्यापक
 जिला परिषद उच्च विद्यालय 
आमनगल , जिला रंगारेड्डी 
90108 02243

---------------------------------------------------------------------------------------------------------

If you like this Writing and want to read more... Then Follow Us
or call
9849250784
for Printed Book
स्वतंत्र भारत का स्वतंत्र साहित्य
Editor
Prasadarao Jami

-----------------------------------------------------------------------------------------------------

scan to see on youtube



scan to join on WhatsApp




BOOK PUBLISHED BY :

GEETA PRAKASHAN

INDIA

Cell 98492 50784

geetaprakashan7@gmail.com

---------------------------------------------------------------------------------

do you want to publish your writing through our BLOGPAGE ?

Please call us 62818 22363

No comments:

Post a Comment

एहसास की खुशबू - सोहन ‘समीं‘ (Geeta Prakashan Bookswala's Anthology "निवेश अक्षरों का")

    (Geeta Prakashan Bookswala's Anthology "निवेश अक्षरों का")     एहसास की खुशबू  💐.......................................💐...