स्वतंत्र भारत का स्वतंत्र साहित्य
मां...
मां के बिना , मेरा कोई वजूद नहीं..
मां के बिना, तुम्हारा कोई अस्तित्व नहीं..
मां से बढ़कर हर किसी को ,कोई देवी नहीं..
मां की कोख के समान , कोई तीर्थ नहीं..
हर दिन मां की मान रखें ,
तो मातृ दिवस की जरूरत नहीं..
मां ममता की मूर्ति है ,
मही में इससे बड़ी स्फूर्ति नहीं..
हर घर मां का सेवाश्रम हो ,
तो वृद्धाश्रम की जरूरत नहीं..
हर पल मां ने समर्पण की है ,
इस से बढ़कर आशीर्वाद संभव नहीं..
दिनेश कमलेकर "विनीत"
हिंदी अध्यापक
जिला परिषद उच्च विद्यालय
आमनगल , जिला रंगारेड्डी
90108 02243
---------------------------------------------------------------------------------------------------------
If you like this Writing and want to read more... Then Follow Us
or call
9849250784
for Printed Book
स्वतंत्र भारत का स्वतंत्र साहित्य
Editor
Prasadarao Jami
-----------------------------------------------------------------------------------------------------
scan to see on youtube
BOOK PUBLISHED BY :
GEETA PRAKASHAN
INDIA
Cell 98492 50784
geetaprakashan7@gmail.com
---------------------------------------------------------------------------------
do you want to publish your writing through our BLOGPAGE ?
Please call us 62818 22363
No comments:
Post a Comment