स्वतंत्र भारत का स्वतंत्र साहित्य
जय हिंदी
हिंदी की शक्ति;हिंदी की भक्ति,
हिंदी में है सब कुछ;हिंदी में है व्याकरण,
हिंदी की लिपि देवनागरी;लगती सबको प्यारी,
हिंदी प्रेम की भाषा; राग-राग मे बसी है।।
हिंदी में है अलंकार;हिंदी में है रस,
हिंदी में है छंद;हिंदी में है सूर लहरी,
हिंदी में है सरगम;हिंदी नवरस भाव,
हिंदी गानों में है छाया;हिंदी की साहित्य विधाएं।।
हिंदी में लेख-कहानी;हिंदी मे गीत-पद्य,
हिंदी भारत मां का भाल है;हिंदी रक्षा सूत्र,
हिंदी ही है मातृभाषा; हिंदी है प्राण प्रतिष्ठा,
हिंदी में आन है;हिंदी में है शान।।
हिंदी मैं है मान;हिंदी है अभिव्यक्ति,
हिंदी है कला;हिंदी से ही हमारीपहचान,
हिंदी है हमारी व्यक्तित्व;हिंदी है मित्र भाषा,
हिंदी में है गरिमा;हिंदी में ही सम्मान।।
लक्ष्मी प्रसन्ना जामि
तेलंगाना, भारत
9346486607
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