Friday, January 14

जय हिंदी - लक्ष्मी प्रसन्ना जामि (स्वतंत्र भारत का स्वतंत्र साहित्य)

 स्वतंत्र भारत का स्वतंत्र साहित्य



जय हिंदी


हिंदी की शक्ति;हिंदी की भक्ति,

हिंदी में है सब कुछ;हिंदी में है व्याकरण,

हिंदी की लिपि देवनागरी;लगती सबको प्यारी,

हिंदी प्रेम की भाषा; राग-राग मे बसी है।।



हिंदी में है अलंकार;हिंदी में है रस,

हिंदी में है छंद;हिंदी में है सूर लहरी,

हिंदी में है सरगम;हिंदी नवरस भाव,

हिंदी गानों में है छाया;हिंदी की साहित्य विधाएं।।

 

हिंदी में लेख-कहानी;हिंदी मे गीत-पद्य,

हिंदी भारत मां का भाल है;हिंदी रक्षा सूत्र,

हिंदी ही है मातृभाषा; हिंदी है प्राण प्रतिष्ठा,

हिंदी में आन है;हिंदी में है शान।।


हिंदी मैं है मान;हिंदी है अभिव्यक्ति,

हिंदी है कला;हिंदी से ही हमारीपहचान,

हिंदी है हमारी व्यक्तित्व;हिंदी है मित्र भाषा,

हिंदी में है गरिमा;हिंदी में ही सम्मान।।

 

लक्ष्मी प्रसन्ना जामि

तेलंगाना, भारत

9346486607


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स्वतंत्र भारत का स्वतंत्र साहित्य
Editor
Prasadarao Jami

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