स्वतंत्र भारत का स्वतंत्र साहित्य
स्वतंत्र भारत
भारत आजाद हुई
पचहत्तर साल हो गये
हम स्वतंत्र भारत की शीतल छाया में
दिन ब दिन उन्नति पा रहे
आज अपनी मातृभूमि की
स्वतंत्रता की उत्सव मनाने जा रहे हैं
इस सुनहरे अवसर पर हम
करें अपने वीरों की याद
जब भारत था अंग्रेजों के चंगुल में,
सभी भारतवासी अर्पण कर दिया अपने आप को.
आजादी की यज्ञ में बन गए समिधि.
दिया उजाला भारत माँ को
अपनी चिता की आग से
लगाया सिंदूर अपने रक्त से
फैलाया खुशी अपने दुःख को छिपा कर.
हे वीर सपूत आज भी तुम
माँ की रक्षा में दिन-रात
हिमगिरि की सीमा पर अडिग खड़े हो.
अपनी और अपने परिवार की चिंता को न दिखाते हुए
हे भारत के वीर लाल
तेरा त्याग महान है
80083 37171
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