स्वतंत्र भारत का स्वतंत्र साहित्य
यूँ तो गाली को बुरा माना जाता है पर यही बात विवाह गीत की आ जाये तो गारी के बिना सब अधूरा लगता है, जिसमें समधी, भसुर की गारी की भरमार है उसी सिलसिला में दूल्हा के लिए भी कोई कमी नहीं है।
दूल्हा
के दीदी
दूल्हा के
दीदी एप्पल
चलावेली हो, लइका फसावेली
हो दूल्हा
के दीदी।
कबो ऊपर
देखावेली, कबो
नीचे देखावे
-कबो आगे
तो कबो
पीछे घुमावेली
हो दूल्हा
के दीदी।
दूल्हा के
दीदी एप्पल
चलावेली हो
लइका फसावेली
हो दूल्हा
के दीदी।
कबो फोन
करके रतिया
भर जगावेली
हो दूल्हा
के दीदी
।
कबो व्हाट्सएप
पर खोलके
देखावेली हो
दूल्हा के
दीदी।
दूल्हा के
दीदी कबो
एगो से
मन भरेला
, तो दूसरों
फसावेली हो
।
कबो कबो त
एक साथे
कई- कई
चलावेली हो
दूल्हा के
दीदी ।
कबो फ़ेसबुक से
तो कबो
टिक टाक
से केहू
के फसावे
ली हो।
कबो
कबो हजारों
के आपन
यार बनावेली
हो , दूल्हा
के दीदी
।
एप्पल चलावेला
लाइका फसावेली
हो, दूल्हा
के दीदी।
(राष्ट्रीय भाषा सेवा संघ)
70131 94457
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