(गीता प्रकाशन Bookswala द्वारा प्रकाशित साझा संकलन से)
प्रसंग (आत्मबल एवं आत्मरक्षण)
नारी सशक्तिकरण से प्रेरित
हे नारी,
मजबूत तुझे इतना हो जाना है।
आंख उठा कर देखे कोई,
प्रहार तुझे कर जाना है।
अब तक तू क्यों शांत रही,
सहती रही,
कुछ भी हुआ, अरे जाने दो,
बस यही कहती रही।
अब तुझे नहीं यह सब सहना है,
बोल दो सब पाखंडियों को,
तुम्हें अपनी हदों में रहना है
बीत गए वह दिन पुराने,
जब तक घूंघट में रहती थी,
जैसा भी कोई कह देता,
वह सब सहती रहती थी।
आज मिली तुझको यह शक्ति,
सारे दुःख दर्दों से मुक्ति।
जोश-जुनून है तेरी शक्ति ,
और कम्रठता में तेरी भक्ति!
अब ना सहेगी, ना ही डरेगी,
बस आगे ही बढ़ती जाएगी।
मंजिल जो दूर नहीं अब तेरी,
सशक्त शक्तिपूर्ण है तू नारी।
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© विकास त्यागी
सचिव भारत विकास परिषद
गौरेला शाखा, छत्तीसगढ़ प्रांत
99935 88896
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