(गीता प्रकाशन द्वारा प्रकाशित साझा संकलन से)
उठ रे जवान, तुझे देश है पुकारता।
बुज दिलों का खून, तुझे आज है ललकारता।
1 आज आई बारी अपनी,मस्ती भी तूफानी है।
गांव की है बचपन और, सीमा की जवानी है ।
दुश्मनों से लड़ने को, माता है पुकारता।
बुज दिलों का खून तुझे ,आज है ललकारता ।
उठ रे जवान तुझे देश है पुकारता।
2 हिंद का तू शेर ,तुझे जानता जहान है।
तुझे जीत पाना एक मिथ्या अभिमान है ।
काटने को शत्रु सिर, देश है पुकारता ।
बुज दिलों का खून, तुझे आज है ललकारता ।
उठ रे जवान तुझे ,देश है पुकारता।
3 हिमालय सा पग तेरे, सीना भी फौलादी है।
बाजूओं की ताकत में ,कश्मीर की वादी है ।
खेलने को खून की होली, कायर है पुकारता ।
बुज दिलों का खून तुझे ,आज है ललकारता।
उठ रे जवान तुझे ,देश है पुकारता।
4 बुझा दे ओ शोले, जिससे जलता चमन है ।
दिखा दे ओ डगर, जिस पे चलता वतन है ।
हम वो शांति दूत जो, संसार को सवांरता।
बुजदिलों का खून तुझे ,आज है ललकारता ।
उठ रे जवान तुझे ,देश है पुकारता।
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© चन्द्रहास सेन शिक्षक
ग्राम व पोस्ट कोसरंगी, थाना खरोरा
जिला रायपुर छत्तीसगढ़
पिन 493225
9752468692
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