(गीता प्रकाशन द्वारा प्रकाशित "शब्द मेरे, विचार सबके" साझा संकलन से)
ओ ब्रज मंडल के गिरधारी, तेरी महिमा अद्भुत न्यारी ।
सूरज चंदा आंखें तेरी, बांह थामे वृषभान कुमारी।
1,मोर मुकुट गले वैजयंती माला,नीरज आंखें भुजा विशाला ।
मुख में मुरली नंद के लाला,केसर तिलक पीतांबर वाला ।
नारद शारद महिमा गाते...2
तू ही है बनवारी हो ।ओ ब्रज मंडल के गिरधारी,तेरी महिमा अद्भुत न्यारी।
2, यमुना तट पे बंशी बजाते, ग्वालों के संग धेनु चराते ।
ब्रज के माखन तुझको भाते, गोपियों के संग रास रचाते।
कालीय नाग को नाथने वाले..2
तू ही श्याम मुरारी ।
ओ ब्रज मंडल के गिरधारी ,तेरी महिमा अद्भुत न्यारी।
3, कंस चाणूर का मर्दन करते ,दुखियों के तुम दुख हर लेते ।
पांडव कुल की रक्षा करते, कौरव कुल की नाश कराते ।
चक्र सुदर्शन धरने वाले ...2
तू ही बांके बिहारी ।
ओ ब्रजमंडल के गिरधारी, तेरी महिमा अद्भुत न्यारी।
सूरज चंदा आंखें तेरी, बांह थामें वृषभान कुमारी।
ओ ब्रज मंडल के गिरधारी ,तेरी महिमा अद्भुत न्यारी।
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© चन्द्रहास सेन शिक्षक
ग्राम व पोस्ट कोसरंगी, थाना खरोरा
जिला रायपुर छत्तीसगढ़
पिन 493225
9752468692
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