(गीता प्रकाशन द्वारा प्रकाशित साझा संकलन "चंचलता अक्षरों की")
'इंसान' --विधाता की बनाई इस सृष्टि का सबसे समझदार ,सबसे बुद्धिमान प्राणी-- शास्त्रों के अनुसार जिसे तीन लाख 84 हजार योनियों में जन्म लेने के बाद मानव शरीर मिलता है ,का आज इतना नैतिक पतन हो गया कि वह इस पूरी सृष्टि को एक अनजान खतरे की ओर ले जा रहा है ।
सबसे पहले बात करते हैं जीव धारियो को जीवित रहने के लिए सबसे ज्यादा जरूरी प्राणवायु -ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है ।जो कि पेड़ पौधों से प्राप्त होती है आज का मानव पेड़ पौधों लगाने के बजाय ,पहले के पूर्वजों द्वारा लगाये गये पेड़ पौधों को काट रहा है ।पेड़ पौधे काटने से दिन प्रतिदिन वर्षा में कमी होती जा रही हैं। पृथ्वी का तापमान बढ़ रहा है अनेक प्रकार की बीमारियां ,अनेक प्रकार की समस्याएं बढ़ती जा रहीं हैं ।अपने लाभ के लिए सुरक्षा मानकों को दर किनार करके कल कारखानों द्वारा ऑक्सीजन को प्रदूषित किया जा रहा है ।लाभ के लिए अनैतिक कार्य करना बात इतनी भी होती तो भी गनीमत थी, बिना मतलब ,बिना किसी लाभ के त्योहार या अन्य शुभ-अवसरो पर खुशियां जाहिर करने के बहाने पटाखे फोड़ कर ऑक्सीजन में जहर घोलना कहां की बुद्धिमानी है
जो अपने प्राणवायु को ही सांस लेने लायक न छोड़ें ऐसे मानव को क्या सबसे समझदार सबसे बुद्धिमान कहेंगे।
जीवधारियों की दूसरी सबसे ज्यादा जरूरी वस्तु है --पानी
वैसे तो इस पृथ्वी के 79% भाग पर जल है लेकिन पीने लायक पानी केवल तीन प्रतिशत ही पीने योग्य है। लेकिन पानी का इस तरह दुरुपयोग देखकर कहीं से भी नहीं लगता की यही सबसे समझदार प्राणी है ।
पानी पहले कुआं से पानी निकलता था फिर हैंड पंप से
अब समर्सिबल से
सबमर्सिबल से इतना पानी निकाल लिया जाता है की प्रति व्यक्ति यदि 50 लीटर की आवश्यकता होती है तो इसे चार या पांच गुना ज्यादा पानी निकाल कर व्यर्थ कर दिया जाता है और वही व्यक्ति पानी व्यर्थ भी करता है और फिर वही व्यक्ति पानी खरीद कर पीता भी है
आज से 20- 25 साल पहले पानी केवल शहरों में बिकता था आज गांव में भी पानी की बोतल और पाउच खूब धड़ाधड़ बिक रहा है।
जीने के लिए जरूरी पानी और हवा प्रकति ने हमें मुफ्त में उपहार स्वरूप दिए हैं। जरा सोचिए यदि पूरे जीवन इन्हें खरीद का उपयोग करनापड़े तो इनकी कीमत का अंदाजा लगाइए
वह दिन ज्यादा दूर नहीं जब मानव की इन्हीं कारतूतो से इस सृष्टि के जीव धारी-- जिनमें से बहुत सारे विलुप्त हो गए और जो बच्चे हैं वह भी विलुप्त हो जाएंगे यदि कुदरत का संतुलन बिगड़ गया तो इंसान भी विलुप्त की श्रेणी में आ जाएगा ।
इस दिशा में किए गए ज्यादातर सरकारी प्रयास केवल कागजों तक सीमित रह जाते हैं। फिर चाहे पेड़ लगाना या फिर पानी का समुचित सदुपयोग।
एक गंभीर समस्या और पर्यावरण बचाने की
पॉलिथीन का उपयोग किस कदर बढ़ गया है कि आज पॉलिथीन के बिना जीवनचर्या ही नहीं चल पा रहीं हैं। इसमें कोई शक नहीं है, मानव ने विज्ञान ,चिकित्सा, संचार, तकनीकी हर क्षेत्र में बहुत विकास किया है। किंतु उदाहरण के लिए यदि आग का प्रयोग खाना पकाने के लिए किया जाए तो यह अच्छी बात है
लेकिन अगर वही आज असावधानी से प्रयोग की जाए तो वह सब कुछ जला भी सकती है ।इसी तरह यह सारी तकनीकियां यदि सदुपयोग किया गया तो ठीक नहीं तो यही विनाश का कारण भी बनेगी। आखिर यह बात इंसान के कब समझ में आएगी कि प्रकृति से वह खिलवाड़ कर रहा है इसके परिणाम बहुत भयंकर होंगे।
जरा सोचिए.........
💐💐💐💐💐💐
© दिनेश कुमार सिंह स अ
कंपोजिट विद्यालय सूदनपुर
विजयीपुर फतेहपुर उ प्र
मो 9450804349
----------------------------------------------------------
------------------------------------------------------------------------------
GEETA PRAKASHAN
Please call us 62818 22363

.jpeg)
No comments:
Post a Comment