गीता प्रकाशन द्वारा प्रकाशित साझा संकलन "स्वराभिषेक विचारों का"
जीवन बस एक प्रश्न है
जिसका उत्तर अब तक मिला नहीं
ये आकाश कुसुम हैं जो अब तक
किसी के हाथों में खिला नहीं
जीवन क्या है? जिसने जैसा जीवन जिया
उसके लिए ये वैसा है
जीवन को परिभाषित किया
सबने अपने अपने अनुभव से
सुख दुःख,अमीरी गरीबी ने,भावों ने अभावों ने
सदा ही बनाया बिगाड़ा जीवन को!
किसके जीवन से किसको क्या मिला?
ये अब तक किसी ने समझा नहीं!
किस पे वारा किसने संवारा
किसका जीवन किसने बनाया
ये जान ने की किसी को फुर्सत कहां?
जब तक अपने हाथों में हैं
अपने जीवन की बागडोर
तब तक उजली उजली है भोर!
आत्मनिर्भरता और स्वाभिमान
जीवन के दो मजबूत आधार
पराधीनता से जीवन को
आज तक सुख मिला नही
जीवन बस एक प्रश्न है
जिसका उत्तर अब तक मिला नहीं
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सुनीता वैष्णव
91111 62889
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