(गीता प्रकाशन द्वारा प्रकाशित *शब्दाभिषेक शिव का* साझा संकलन से)

जागो जागो भोलेनाथ! जागो हे त्रिपुरारी!
तेरी कृपा के ऋणी हम, तेरे हम आभारी।
तुझ में ही बसता है, ये जीवन हमारा।
तुझसे ही बहती है, गंगा की अमृतधारा।
तुझ बिन नहीं कोई अपना,
तेरे बिन कौन अपना सहारा?
जागो जागो भोलेनाथ! जागो हे त्रिपुरारी!
तेरी कृपा के ऋणी हम, तेरे हम आभारी।
आया! आया! सावन आया! हर-हर बम-बम।
तू घट-घट का है स्वामी,
तू महाकाल, तू औघड़दानी।
तुझ में समाई दुनिया, तू है अंतर्यामी।
तू भोला भोलेबाबा, तू हम सबका रखवाला।
खा के भांग-धतूरा, मल के राख अंग पूरा।
नाचे भूत-प्रेत, चांडाल सब, नशे में पूरा पूरा।
जागो जागो भोलेनाथ! जागो हे त्रिपुरारी!
तेरी कृपा के ऋणी हम, तेरे हम आभारी।
आया! आया! सावन आया! हर-हर बम-बम।
तू ध्यानियों में महाध्यानी, तू ज्ञानियों में महाज्ञानी।
तू योगियों में महायोगी, तू वेद स्वरूप आत्मज्ञानी।
मृत्युंजय तू कहलाता, देता जीवन तू बनकर दाता।
तू ॐ रूप ब्रह्मांड स्वामी, तुझसे ही सृष्टि की कहानी।
तुझ बिन हिल नहीं सकता पत्ता,
कण-कण में तू ही रचता-बस्ता
जागो जागो भोलेनाथ! जागो हे त्रिपुरारी!
तेरी कृपा के ऋणी हम, तेरे हम आभारी।
आया! आया! सावन आया! हर-हर बम-बम।
💐💐💐💐💐💐
कवि पी यादव 'ओज'
साहित्यकार
चौकीपाड़ा, झारसुगुड़ा।(ओडिशा)
99375 10641
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