(गीता प्रकाशन द्वारा प्रकाशित साझा संकलन "स्वराभिषेक विचारों का" )
राजस्थानी गाथा को सब मुक्त कंठ से गाओ।
राजस्थानी माटी का तुम, मंगल तिलक लगाओ।।
भक्ति और शृंगार वीर रस का जिसमें मिश्रण है।
त्याग तपस्या बलिदानों से परिपूरित कण-कण है।
भक्त- शिरोमणि मीरा का श्रीकृष्ण प्रेम संचित है।
और कहानी पद्मिनी की असि-रक्त-रंजित है।
पौरुष महाराणा प्रताप का तुम दिल से अपनाओ।।
सुत देकर पन्ना ने अपनी स्वामिभक्ति निभाई।
रामदेव, धन्ना ,दादू ने भक्ति अलख जगाई।
शीश काट दे ,कर जौहर क्षत्राणी आन रखाई।
भामाशाह ने धन देकर माटी की लाज बचाई।
कथा पुनः पाथळ-पीथळ की एक बार दोहराओ।।
हम्मीरदेव-से इस माटी ने शरणागत-प्रतिपाल दिए।
जयमल-फत्ता,गौरा और बादल-से जिसने लाल दिए।
कुंभा,सांगा,रत्नसिंह, और पृथ्वीराज भूपाल दिए।
जिनके आगे दिल्ली की सेना ने शस्त्र डाल दिए।
लाज रखो इन बलिदानों की ,रज को मस्तक लाओ।।
बारहठ बंधु और पथिक आजादी के दीवाने।
सेठी गोपा खरवा जमनालाल नहीं अनजाने।
बिस्सा हीरालाल शास्त्री अमरचंद परवाने।
इनके बलिदानों की गाथा धरा-गगन भी जाने।
मस्तक-माला चढ़ा मात चरणों का मान बढ़ाओ।।
💐💐💐💐💐💐
© संतोष कुमार सैनी "शुभम्"
व्याख्याता
रा उ मा वि छारेड़ा दौसा
97822 98528
----------------------------------------------------------
------------------------------------------------------------------------------
GEETA PRAKASHAN
Please call us 62818 22363

.jpeg)
No comments:
Post a Comment