(गीता प्रकाशन द्वारा प्रकाशित *डॉ.सुषमा सिंह* कृत साझा संकलन "अक्षराभिषेक साहित्य का " )
धैर्य को अपने कभी न डगमगाओ
जिंदगी तुम्हारी है खुल कर जीयो
क्यों किसी की बातों में अपने
अश्रुओं को बहाओ
अपनी इच्छा से अपने पंखों को फैलाओ
दुनिया आज कुछ कहती है
कल कुछ कहती है
वह अपने हिसाब से अपने
नियमों को बदल लेती है
क्यों फिजूल बातों से
अपने दिल को दुखाओ
अपनी इच्छा से अपने पंखों ----
खाली समय में अपने
हुनर को बढ़ाओ
अपने इस हुनर से
किसी जरूरतमंद के काम आओ
अपने हुनर से लोगों के जीवन में
खुशियों के रंग बिखराओ
अपनी इच्छा से अपने पंखों ----
सादा जीवन उच्च विचारों के
गुणों को अपनाओ
और प्रभु का गुणगान मिलकर
नित रोज गाओ
इसी से प्रभु की कृपा बरसेगी
प्रभु कृपा से अपने जीवन को धन्य बनाओ
अपनी इच्छा से अपने
पंखों को फैलाओ
💐💐💐💐💐💐
© संगीता अग्रवाल
आगरा
मो.9719102232
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