(गीता प्रकाशन द्वारा प्रकाशित साझा संकलन "कलम मेरी पहचान" )
देश में है कितने भाषा -
संस्कृत , वैदिक आदि अनेक भाषा ,
वैदिक की गर्भ से बना हिंदी भाषा ,
जो बन गई राष्ट्र भाषा ,
हिंदी भाषा बना -
हृदय की आशा -
हर नवोदित साहित्यकारों में छुपा आशा ,
इस की है प्यासा जिज्ञासा ।
भाषा हमारा हिंदी ,
विश्व में चमक रही -
बन के भारत माता की माथे की बिंदी ,
चमक कितनी निराला ,
लिखने बोलने सुनने में ,
अद्वितीय प्यारा ,
हिंदी ज्योति बन के ,
विश्व को कर रही ज्ञान से उजाला।
विश्व में फैले हिंदी भाषा ,
कितनी सुंदर है भाषा ,
हिंदी में हर बार जन्मूँ
हिंदी में हर बार मरुँ ,
यहीं मेरा अभिलाषा ,
देख रहा हूँ -
सुन रहा हूँ -
फिर मैं लिख रहा हूँ ,
मुझे है और सीखने की प्यासा ।
11 सितंबर 1893 को पहली बार -
विश्व ने शिकागो में ;
हिंदी भाषा को स्वामी विवेकानंद से सुना ,
विश्व ने उसी दिवस ,
महान भाषा हिंदी को जाना ।
10 जनवरी 1949 में -
संयुक्त राष्ट्र महासभा में ;
हिंदी बोली पहली बार ,
हिंदी विश्व दिवस ,
होता तब से शुरु -
उसी दिवस से -
मानने लगा भारत को -
विश्व ने विश्व गुरु ,
इस का तो इतिहास है ।
विश्व ने हँस के अभिनंदन किया -
हमारे हिंदी भाषा को ,
जग को जगा के -
फैलाया आलौकिक ज्योति ,
समीर का मंद हुआ गति ,
वीणावादिनी की विमल वाणी ;
कमल कोमल में लिप्त ,
पाटल के पंखुड़ियों में हिंदी में लिखा गीत ,
विश्व में फैले हिंदी ज्ञान संगीत ।
स्वामी विवेकानंद भाषण ने -
पवन विहंगिनी नीड़ में -
व्योम मंडल को ज्ञान तीर ने ;
कादंबिनी गिरि में -
लिखा हिंदी भाषा में इतिहास।
दसों दिशाएं रहे गये मौन -
पूछ रहा विश्व ; हिंदी में भाषण ,
दे रहा है कौन ,
गतिहीन जीव , निर्जीव में प्राण ,
पुलकित पुष्प से सुगंधित स्थन ,
मुझे है हिंदी भाषा में अभिमान ;
क्यों ना करुँ अभिमान ,
ऐसा कर्म किया -
पंक का पंकज महान ,
विश्व में देश के आर्य - संतान ,
हिंदी भाषा को विश्व में दिलाया पहचान ,
देश का हिंदी भाषा महान ,
हिंदी को शत् शत् नमन ।
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© रतन किर्तनीया
गांव :- रविन्द्रनगर (पि ,व्ही 17 )
पोस्ट :- रविन्द्रनगर ( पि व्ही 17 )
तह : - पखांजूर
जिला :- कांकेर ( छत्तीसगढ़ )
पिन नं :- 494776
93436 00585
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