(गीता प्रकाशन द्वारा प्रकाशित प्रमिला झरबड़े मीता कृत साझा संकलन "कलम मेरी पहचान")
मेरे घर की हर खुशी है, अब तुम्हारे हाथ में
घर में बजती पायलों की, नुपुर तुम्हारे हाथ में
हर पिता की प्राण बिटिया, मां की है सच्ची सखी
हर घड़ी लड़ती झगड़ती,भाई रो-रोकर दुखी
खिलखिलाते आंगन का हर, शगुन तुम्हारे हाथ में
मेरे घर की हर खुशी है, अब तुम्हारे हाथ में
आरती की थाल लेकर, द्वार खड़ी मां वन्दना
भाव और सुख संपदा की, जो स्वयं है व्यंजना
सुर में बजती रागिनी की, धुन तुम्हारे हाथ में
मेरे घर की हर खुशी है, अब तुम्हारे हाथ में
विपदाओं ने हार मानी, हैं पिता वो ही अजय
हारकर भी जीत जाते, चाचा वो ही हैं विजय
मामा फूफा भी खड़े हैं, भाई तीनों साथ में
मेरे घर की हर खुशी है, अब तुम्हारे हाथ में
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© कवि राजेश विश्वकर्मा "प्रसाद"
बी. एच. ई. एल. भोपाल
90984 96497
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