(गीता प्रकाशन द्वारा प्रकाशित प्रमिला झरबड़े मीता कृत साझा संकलन "कलम मेरी पहचान")
ऐ मृत्यु,
मुझे अहसास है कि तुम शाश्वत सत्य हो,
तुम अटल हो, निश्चित हो, इस
जीवन का अंतिम छोर हो,
एक दिन मुझे गहरी नींद में सुला
कर ले जाओगी अपने साथ,
तुमसे डरता है हर कोई,
क्योंकि ...
जिंदगी को हराने वाली तुम ही हो,
पर सच कहूं तुमसे तो तुम मेरी प्यारी
सखी हो, तुम्ही तो सच्ची संगिनी हो,
तुम हो तो जीवन की मान्यता है,
ईश्वर की आराधना है, आध्यात्म की प्रेरणा है, नैतिक मूल्यों की पूजा है,
संसार से मुक्ति है, मोक्ष की
प्राप्ति है.....
तुम मृत्यु नही बल्कि सद्कर्मों पर चलाने
वाली...क्षमा, विनम्रता, उदारता
और सेवा भाव का पाठ पढ़ाने वाली,
मेरी गुरु भी हो....
मै व्याकुल हूं, तुम्हारी गोद में मिलने
वाले उस चिर आनंद के लिए,
मै प्रतीक्षारत हूं...जब आओगी तो
खुले ह्रदय से स्वागत करूंगी तुम्हारा...
बस तुम आ जाना, देखो ध्यान
रखना, प्रतीक्षा ज्यादा न कराना,
तुम आना और ले चलना मुझे
उस दिव्य प्रकाश की ओर,
मेरे आराध्य के निकट, जहां
सारे बंधन शिथिल हो जाते हैं,
देह से परे जहां आत्मा विश्राम
पाती है......
उस अनंत विश्राम के लिए...
मोक्ष के लिए.... उद्धार के लिए...
मेरे प्रभु के पास .... मुझे ले चलने
ऐ मृत्यु तुम आओगी न.....
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© प्रियंका श्रीवास्तव 'प्रियांजलि'
भोपाल
98938 13282
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नाम - प्रियंका श्रीवास्तव
शिक्षा - एम.ए. एम.लिब. एम.एड. एवं पी.एच.डी. (अनुसंधानरत)
भाषा ज्ञान - हिंदी एवं अंग्रेजी
रुचि - लेखन, पठन, समाज सेवा एवं पाक कला। हिंदी साहित्य से विशेष जुड़ाव।
लेखन विधा - कविता, आलेख एवं लघुकथाएं।
कार्यक्षेत्र - पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान प्रौद्योगिकी
पद - पुस्तकालयाध्यक्ष
पता - पी - 81, प्रियंका नगर, कोलार रोड भोपाल (म.प्र.)
पिन - 462042
मो.न. 9893813282
प्रकाशन-
दैनिक जागरण, नवदुनिया, पत्रिका, दैनिक चित्रकूट ज्योति आदि अनेकों समाचार पत्रों में कविताओं, लघुकथाओं एवं आलेखों का प्रकाशन।
सम्मान - अनेक क्षेत्रीय तथा राष्ट्रीय मंचों द्वारा काव्यपाठ एवं लघुकथा पाठ हेतु सम्मानित।
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