Monday, January 1

जिन्दगी में खास - राजेश शेखावत (गीता प्रकाशन द्वारा प्रकाशित साझा संकलन "कलम मेरी पहचान")

  (गीता प्रकाशन द्वारा प्रकाशित साझा संकलन  "कलम मेरी पहचान")


जिन्दगी में खास
💐..................................💐


तुम जिन्दगी में खास बन गए हो

मेरे जीने का अहसास बन गए हो

जो दिखाई न दी कभी किसी को 

वो समंदर की प्यास बन गए हो


मेरे जीने का आधार बन गए हो

टूटी कश्ती की पतवार बन गए हो

रोज खुशियों के मेले लगते हैं जहां

मेरा वो खूबसूरत संसार बन गए हो


प्यासी आंख का पानी बन गए हो

खामोश कलम की जुबानी बन गए हो

डूबता सूरज भी मुझको गले लगाता है

ढलती शाम इतनी सुहानी बन गए हो


गुमनाम चिट्ठी का पता बन गए हो

किसी नए देश की सता बन गए हो

जर्जर होते खंभे को भी जो सहारा दे

कोमल फूलों की वो लता बन गए हो


शुद्ध प्रेमरुप का चरित्र बन गए हो 

तुम गरीब सुदामा का मित्र बन गए 

जमी से आसमां तक महकती है जो

तुम ऐसी खुशबू का इत्र बन गए हो


कस्तूरी वाला हिरण बन गए हो

उगते सूरज की किरण बन गए हो

जंगल में राजा को कोई भय न हो 

साधु संत की वो शरण बन गए हो


सरसो के फूलों का रंग बन गए हो

किसी अधूरे ढोल की चंग बन गए हो

सूखी मिट्टी भी गर्भ धारण कर रही है

तुम बंझर खेत की उमंग बन गए हो


पनपते चमन के माली बन गए हो

हंसते दीपों की दिवाली बन गए हो

महकने लगा है घर बार सारा तुमसे

चंदन के पेड़ की डाली बन गए हो


अंगूठी की आंख का नगीना बन गए हो

प्रेम वाला फरवरी का महीना बन गए हो

जो नवजात बच्चा सुकून पाता है जहां 

ममता भरी मां का वो सीना बन गए हो


जंग में जख्मी योद्धा की ढाल बन गए हो

रात में चलते अंधेरे की मशाल बन गए हो

ठंड में राहत पाता बदन सीने से लगाकर 

तुम मखमली ऊन की वो शॉल बन गए हो



कुछ खास तुम्हारे लिए,,,,👉


तुम्हारी मोहब्बत और व्यवहार को देखते हुए

तुम्हारी सादगी से भरे प्यार को देखते हुए 

न जाने कितनी सूखी लकड़ियों ने अंगड़ाई तोड़ते हुए

तुमसे तुम्हारी मांग की सिंदूर का रंग मांगा है

जैसे सोने के आभूषण ने अपना बदन मांगा है

वह भी अपनी उजड़ी जिंदगी में थोड़ा रंगभर सके,

जो नामुमकिन था वो काम तुमसे मिलकर कर सके 

तुम्हारी यही छवि बेजुबानों में 

धड़कन पैदा करने का काम करती है 

मुझे खुशी है ऐसी हस्ती मेरी मोहब्बत को 

प्रणाम करती है!


जब कभी रक्षाबंधन के त्यौहार पर तुम्हे बहन के रूप में आवाज लगाता रेल का इंजन अपने कंधों पर लदे हुए उन डिब्बों में खचाखच भरी बहनो की भावनाओं को उनकी मन की गति से भी तीव्र दौड़ता हुआ खुशी-खुशी सहर्ष ले जाता है उनके भाई के द्वार पर !

ताकि वे बहने अपने भाई की कलाई पर रक्षासूत्र बांधकर एक खूबसूरत त्यौहार मना सके

उन पर जी भर के प्यार लूट सके

मगर इंजन की अकेलेपन की बेचैनी खामोशी को तुम समझती हो

जब तुम कभी बांधती हो रेल के इंजन की कलाई पर राखी तो वह गदगद हो उठता है आशीर्वाद में तुम्हारे सर पर हाथ रखता है तुम्हारी रक्षा का वचन देता है तुम्हारी यही खूबी तुम्हारा यही इंसानियत का धर्म जंग लगे लोहे को भी बोलने पर मजबूर कर देती है और साथ में तुमपर प्रेम जताने लिए उत्साहित करती है!


सर्दियों की ठिठुरती रातों में पेड़ों की सिकुड़ती टहनियों को तुमने अपनी मोहब्बत की गरमाहट दी है उनकी फिक्र करते हुए उनकी बिस्तर पर सिलवटों से भरी चादर को तुमने अपने कोमल नर्म हाथों से इस्त्री करके बड़े प्यार से  ओढ़ाया है जैसे एक मां बच्चे की फिक्र करती है

जमीन पर विराजमान सभी प्रकृति से जुड़ी उन हर छोटी चीजों का तुम इस तरह ख्याल रखते हो यही तुम्हारी खूबी पृथ्वी के सभी प्राणियों में एक इंसानियत की अलग ही मिसाल के रूप में तुम्हें पहचान दिलाती है!


जब तुमने कभी पहाड़ो को रोते देखा झरनो के रूप में तुमने झरने की गोद में बिखरी उनकी भावनाओं को मोतियों का रूप देकर उनको माला में पिरोकर तुमने अर्पण किया है उनको और बातलाया है उसका अस्तित्व की झरने के बिना नदियों की कोई पहचान नहीं होती,  नदियों के बिना कभी समंदर पैदा नहीं होता ना ही उसकी जवानी आगे बढ़ती!

यह सब बातें तुम बहुत बारीकी से समझती हो और उनको समझाती हो ,,,मैं यही सब जानने को तुम्हारे मन से होती हुई मेरे मन तक पहुंची हमारे प्रेम रिश्ते में बनी कोमल सीढ़ियों की हथेलियों पर आहिस्ता आहिस्ता अपने कदम रखते हुए तुम्हारे अंदर रूह तक उतरता हूं तुम्हें पढ़ता हूं और समझता हूं,तुम्हारी इन्हीं खूबियों से ही मुझे बेहद प्रेम है और मैं खुश हूं कि मुझे ऐसा महबूब मिला है 

जो हर बात के पहलू को मुझसे बेहतर समझता है!


जब किसी नृत्यांगना की घुंघरू के बजते हुए गीत में उस घुंघरू की झंकार का टूटने के कारण उस अधूरे गीत को अपनी आवाज में तब्दील करके उसको पूरा किया तुमने,,

तुम्हारे इसी हुनर के बाबत मेरे शहर में आयोजित होने वाले उच्च कोटि के प्रसिद्ध कवि सम्मेलन के हॉल में खचाखच भरे श्रोतागण के साथ वहां के कुर्सी और पर्दे यहां तक की माइक भी तुम्हारी आवाज के कायल हो गए तुम्हारे किरदार के मुरीद होकर रह गए !

ऐसा हुनर सदियों से शायद किसी इंसान को मिलता है यह खुदा की रहमत है तुमपर जो तुम्हे इतने खूबसूरत आवाज की जादूगरनी के नाम से नवाजा है जहां आप खामोश चीजों का भी दिल जीत लेते हो आपकी खूबसूरती के साथ आपका इतना मधुर वाणी मधुरमयी गीत जो लोगों के कानों में मिश्री घोलता है इस ओहदे का हुनर पाना अपने आप में एक बहुत बड़ी उपलब्धि है!


याद होगा तुम्हें जब उस कलम की स्याही ने कलम को धोखा दे दिया था,उसे अपने प्रेमी को पत्र लिखते हुए,और वह बहुत विचलित हुई थी तब तुमने ही उसे अपने गले लगाकर ढांढस बंधाया था,

अपनी कजरारी नैनो का काजल 

अपने ही नाजुक हाथों से तुमने उसको समर्पित किया था तुम्हारी बदौलत ही अधूरे पड़े उसके प्रेम पत्र की प्रेम कविता को तुमसे नए पंख मिले! वह कलम भी अपने प्रेमी के समक्ष लज्जित होने से बच पाई

और तुम्हें लाख-लाख दुआएं थी और हमारे प्रेम संबंध को कभी न टूटने का विश्वास दिया आशीर्वाद दिया,मैं खुद ऐसी शख्सियत ऐसे महबूब को नमन करता हूं!!


ऐसी जाने कितनी मिसाले है जो तुम्हारे इंसानियत की व्यक्तित्व की जो आंखों पर काली पट्टी होते हुए भी हर इंसान को पारदर्शी प्रतीत होता है तुम्हारा वो किरदार,,हां 

जब किसी एक ही परिवार के लोग वो मेरी कमीज में लगे हुए बटन और धागे आपस में जब उलझते हैं अपनी जमीनी बंटवारे को लेकर उनको बहुत ही शिष्टता से तुम समझाती हो उनकी उलझी हुई गुत्थी को तुम अपनी नर्म नाजुक उंगलियों से सुलझाते हुए प्यार से समझाते हो 

और किसी एक खूबसूरत परिवार को आंगन में बंटवारे की दीवार खींचे जाने में आजीवन प्रतिबंध रोक लगाते हो यह तुम्हारा अहम योगदान है जो किसी अपने सगे रिश्ते का कत्ल करने से रोकता है उन्हे बिछड़ने से रोकता है?!!


जब कभी चांदनी रात में चांद विचरण करता हुआ अपने पथ से भटक जाता है तब तुम्हारे माथे की बिंदी

सितारे की भांति चमकती हुई जुगनू की आंखों की तरह टिमटिमाते हुए उसे फूलों की कालीन बिछी हुई पथ की ओर प्रदर्शित करवाती है यह शक्ति है तेरे बदन की तेरी मोहब्बत की जो तेरे माथे को चूम कर तेरी बिंदिया तेज रौशनी से लबरेज सितारे के रूप में ढल जाती है 

अपना छोटा आकर होने के बावजूद भी पूरे ब्रह्मांड के उस विचित्र ग्रह को जो सबकी दुनिया में एक अहम स्थान रखता है उसको भी अपनी व्यक्तित्व की छवि पेश करते हुए गुरु के रूप में उसके हृदय में स्थान बनाते हो

ऐसा व्यक्तित्व लिए हुए कहां कोई जन्मो~जन्मो तक पैदा होता है!!


तुम्हारे गोल गुलाबी रसगुल्ले से रसभरे गालों से बरसते उस मधुर शहद जैसी उस चाशनी ने न जाने कितनी ही सूखी गन्नों की खेतों की जिंदगी में रस भरा है उनको अमृत पान दिया,जैसे कि लक्ष्मण को मूर्छित अवस्था में संजीवनी बूटी दी हो यह उपकार है तुम्हारा उनपर जो उनको एक नया जीवन प्रदान किया, जिसकी खास वजह से वह दुनिया भर में जाने जाते हैं उनकी मिठास को आपने उनके बदन को सौंपकर उनको नए प्राण दिए है किसी गरीब अन्नदाता की जिंदगी को खुदखुशी से बचाया है!


मैं तुम्हारे इतने करीब होते हुए भी तुम्हारी जिंदगी में अहम स्थान रखें होने पर भी तुमपर अपने आप से लेकर अपने प्यार को समर्पित करने के बावजूद तुम्हारा हक पाने के बावजूद खुद पर तुम्हारा समर्पण होने के बाद भी जाने मैं तुम्हारी मांग में सिंदूर क्यों नहीं टांक पाया

यह सवाल दिन रात मुझे खलता है उसका उत्तर सिर्फ तुम्हारे पास है,तुम्हारे पास जुबां होते हुए तुम खामोश रहती हो इस सवाल पर

जाने कोई डर है जो तुम्हें इस सवाल का जवाब देने पर परहेज करने को मजबूर करता है!


जब भी कभी मैं टूटा बिखरा तुम्हारी चूड़ियों की खनक ने मुझे सहारा देते हुए सीने से लगाया और मुझे तसल्ली दी तुमने अपनी चुनरी के धागे से मेरे उस फटे हुए घाव को सिला विश्वास दिलाया मुझे हिम्मत दी और जैसे किसी सूखे पड़े के किसी तिनके को दो बूंद पानी की मिलने पर उसमे रवानी आती है यह तेरे प्रेम का ही तो सब असर है जो मुझे फिर से हरा होने को तैयार किया एक भरोसे के साथ!


एक तेरा साथ रहा मेरे हमदम तो किसी बेरंग सी तस्वीर में भी मैं रंग भर सकता हूं तेरी मोहब्बत की अगर सदा इनायत रही मुझपर तो एक मेरे जूते के तसमे में पूरी दुनिया को बांधकर तेरे कदमों में डाल सकता हूं तेरी मोहब्बत का असर है मेरे अंदर ये जुनून पैदा करता है नामुमकिन को भी मुमकिन करने के लिए मेरा दिल मेरे दिमाग से अंदर ही अंदर एक जंग लड़ता है!


मैं देखता हूं बहुत बार तूने अपने हुनर के बने हुए सिपाही को इस तरह तराशा है जो अपने आप में एक महान है उनको देखा है बहुत बार हर जंग में लड़ते हुए अपना हुनर दिखाते हुए शहर~शहर गांव मेले में घूमते हैं उन्हें कई प्रदर्शनी लगाई हैं तुम्हारे चित्रकारी की तुम्हारे द्वारा सिखाए गए उस हुनर की उस पहचान की उन्होंने हवाओं में न जाने कितनी ही हवाओं की बिरादरी को रंगा है यहां तक इंद्रधनुष को भी वह रंग भी तुम्हारे हुनर के द्वारा सौंपे गए हैं जो फूलों का रंग है हर फूल तुम्हारी उस रंग का पैगाम दर्शाता है तुम्हारी खुशबू के आगे सर झुकाता है फूलों पर बैठी तितलियों के पंखों पर भी चित्रकारी तेरे हुनर की ही पहचान दिलाती है वह अपनी उन रंग बिरंगी रेखांकित की हुई चित्रकारी को लेकर जब भी टहलने निकलती है तो लोगों के मुंह से स्वतह ही उस प्रसिद्ध कलाकार का कलमकार का इस हुनरबाज का नाम जुबां पर आता है वे तितलियां भी जैसे तुम्हारा प्रचार करती हुई फूला नहीं समाती हैं इतना प्रसिद्ध होने का तमगा तुमने यूं ही नहीं पाया है

तुम पूरे इस धरातल पर इस तरह छाई हो हर लोगों के जेहन में बसे हो जैसे किसी एक गांव के बड़े रईसजादे  की छोटी सी उम्र में ही उसकी इंसानियत को गांव का हर इंसान नमन करता है यहां तक की किसी मां की गर्भ में पल रहे शिशु को भी तुम्हारी इंसानियत का आभास है

तुम्हारी काबिलियत पर विश्वास है वह भी तुम्हारे आगे सर झुकाता है तुम्हारे चरणों में शत-शत नमन करता है इतनी सी कम उम्र में इतनी बड़ी बुलंदियों को छूना ऐसे लगता जैसे आसमान के उस छोर पर बैठे विधाता के बराबर आपकी पहचान है मेरे हमदम इससे बड़ी और क्या मिसाल दूं मैं तुम्हारी छवि की मेरी नजरों से परख कर इतना माना है तुम्हें!


तेरे मन में पल रही मेरी मोहब्बत की कोमल उस

स्पर्श से मेरे अंदर जल रही न जाने कितनी ही 

सपनों की चिताओं की आग को ठंडक मिली है

जैसे किसी धूप को राहगीर की परछाई की 

छांव में आराम मिला है 

बहुत दिनों से खाली बैठे किसी शायर को 

उसकी पसंद का काम मिला है

ढलती सांझ को भी पंचायत में इज्जत मिली है

गरीब मां के बेटे को मनपसंद मोहब्बत मिली है

दोनों आंखों को जिस्म के बंटवारे में तराजू में तौलकर

बराबर नए सपने मिले हैं

मेले में घूमते बालक को खोए हुए अपने मिले हैं

नीम की पत्तियों को भी शहद मिला है

जंगल में जख्मी शेर को कोई वैद मिला है

धुंधली रौशनी को जैसे चश्मा मिला है

बेगानों की महफिल में अपना मिला है

बरसात की बूंदो को छतरी मिली है

ठिठुरते मौसम को चाय की टपरी मिली है 

बुझते दीए को जैसे नई बाती मिली है

बिना मां के बच्चे को प्रेम की पाती मिली है

खत्म होती तारीख को नया जन्म मिला है

एक गमले में रंग बिरंगे फूलों का बाग खिला है

किसी नादान बच्चे ने पाठशाला खोली है

लफ्जों से लफ्जों ने मिलाकर जुबां खोली है

आसमा को जमीन पर मकान मिला है

किसी पुराने खंडहर को मेहमान मिला है

उगते सूरज को किरण का प्रणाम मिला है

भटकते रास्ते को कोई गांव मिला है

किसी कुर्ते को धोती का साथ मिला है 

फिसलते हाथ को कोई हाथ मिला है

धागे को सुई से बेशुमार प्यार मिला है

सूखी घास को मां बनने का समाचार मिला है

आंखों से बहते दरिया की प्यास बुझी है

जैसे दौड़ते समय के इंतजार में ट्रेन खड़ी है

डाकिए को चिट्ठी से मिलने का पैगाम मिला है

जैसे रक्षा में कर्ण को कवच कुंडल दान मिला है

डूबते दरिया को कश्ती मिली है

खुशनसीब हूं मैं तेरे रूप में इतनी बड़ी हस्ती मिली है!


यह सब बातें तुम्हारे विचित्र अकल्पनीय अविश्वसनीय तुम्हारे व्यक्तित्व को दर्शाती है कभी मेरी नजरों से खुद का मुआयना करना !

तुम्हें मेरे द्वारा कही गई सब बातों में एक हकीकत नजर आयेगी इन सब बातों में तुम्हें वह सच नजर आएगा जिसके प्रति तुम अभी तक अनजान हो

हमेशा जाने तुम्हें खुद के बारे भ्रम रहता है कि एक ही शख्स में इतनी खूबियां कैसे हो सकती है!😊


विशेष : ~गुजारिश अब बस यही है ऊपर बैठे उस विधाता से कि इस विश्व के धरातल पर जन्म लेने वाले सभी प्राणियों के कार्यकर्ता से नम्र निवेदन है इस नववर्ष की नींव की ईंट रखें जाने के वक्त से लेकर तुम्हारी मन की गति की रुकने के अंतिम छोर अंतिम छण तक तुम्हारी जिंदगी में उन्नति और समृद्धि का बहाव हो,,,तुम्हारी काबिलियत पर फिदा होकर ईश्वर हर दिन तुम्हे आप से खुद तुम्हारा हाथ पकड़कर तुम्हे ऊंचाइयों का मुकाम की हर दहलीज पर लेकर जाए जिंदगी में कभी तुम्हारे कोई गमो का साया भी हवा के बहकावे में आकर भी तुम्हे छू ना पाए!

हर दिन प्रातकाल से संध्या समय तक खुशियां खुद तुम्हारे चरणो में शीश नवाए हर दिन रंगीन रंगों से रंगा हो तुम्हारा

तुम्हारी मधुर आवाज को अनेकों गीत मिले इस फिजा में फैले कई मधुर रस भरे शब्द खुद तुम्हारी जुबां पर आने के लिए आतुर हो,,सजीव निर्जीव चीजों से संबंध रखने वाले को तुम अपने किरदार कायल बना कर रखो,सदा उस खुदा का तुम्हारे सर पर हाथ रहें!

हमेशा फूलों की तरह खिलखिलाते रहो मुस्कुराते रहो जीवन में हमेशा उन्नति की सीढ़ियां चढ़ते रहो खुदा से हमारी यही दुआएं तुम्हारे इस नई साल की पहली किरण आपके जीवन के हर पहलू में खुशहाली लाए !

जिनकी धड़कन के साथ हमारी मन की गति अपनी पथ पर कदम बढ़ाती है दिल की सांस लेने से हमे सांस आती है,, हमारे जीवन में इतनी अहमियत रखने वाले शख्स के किरदार को 

हमारी तरफ से नववर्ष की ढेरों हार्दिक बधाइयां शुभकामनाएं😊💐💐🍫🤗🌹🫂🎁🏆🍫🤝


साथ जो मिला है तुम्हारा साथ ये बनाएं रखना

बुझती आंखों में भी घी के दिए जलाए रखना

चलती जाएगी इस प्रेम रिश्ते की गाड़ी जो यूं

आप धड़कन से हमारी रूह को मिलाए रखना


तेरा आना मेरी जिंदगी में क्या~क्या कर गया

सर्दियों में पसीने आते गमो को हवा कर गया!

पाकर खुश हूं तुमको मैं एक फकीर की भांति

कांसे में कोई जिंदगी भर का अमृत भर गया!!


💐💐💐💐💐💐

© राजेश शेखावत (B+)

झुंझुनू 

97855 66396

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लेखक परिचय

नाम : राजेश सिंह शेखावत!

योग्यता :  स्नातक, आर्ट, विश्वविद्यालय जयपुर स्नातक

पसंदीदा लेखक :  श्री मुंशी प्रेमचंद जी, महादेवी वर्मा, अमृता प्रीतम, डॉ.कुमार विश्वास, तहज़ीब हाफी!

रुचि : किताबें पढ़ना,कविताएं लिखना, बेजुबान खामोश चीजों का दर्द को समझना, नई जगह पर घूमना, खाने पीने का शौकीन,गाने सुनना!

लेखन विधा : शायरी, गजल, नज्म,पत्र,कविता!

प्रकाशन : 

>(1)अचीवर पब्लिकेशन प्रेजेंटस पब्लिकेशन के साझा संग्रह में , ठिकाना तेरा शहर , पुस्तक में एक कविता,,गरीब लड़की ,,के रूप में प्रकाशित हुई है!

> (2) ज्ञानेश्वरी प्रकाशन के माध्यम से प्रकाशित पुस्तक,, प्राइड ऑफ वर्ल्ड वुमन,साझा संग्रह में सात रचाएं प्रकाशित हुई है

>( 3) यश पब्लिकेशन के माध्यम से प्रकाशित पुस्तक,,अराधिका,,में,वो स्त्री है ,,कविता प्रकाशित हुई है!

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अपने बारे में विशेष :

    मेरा नाम राजेश सिंह शेखावत है मै मूल रूप से राजस्थान के वीरों की भूमि,शहीदों की भूमि कहे जाने वाले झुंझुनू जिले से ताल्लुक रखता हूं मुझे कविताएं, शेर, गजल, नज्म लिखना पसंद है,और अपनी कविताओं में अपनी गजलों में हमेशा बेजुबान और खामोश चीजों के दर्द को समझकर शब्दों में पिरोने की कोशिश करता हूं ,मैं लगभग दो वर्ष से प्रतिलिपि हिंदी साहित्य मंच पर लिख रहा हूं एव लेखन कार्य जारी है ! प्रतिलिपि द्वारा गोल्डन बैच से सम्मानित ,मैंने अपने दो वर्ष के लेखन के सफर में प्रतिलिपि मंच पर लगभग छः सौ से अधिक स्वरचित मौलिक रचनाएं लिखीं है और भविष्य में अपनी रचनाएं इसी प्रकार लिखता रहूंगा मैं अपनी रचनाओं से लोगों का मार्गदर्शन,और मनोरंजन करना चाहता हूं !

उम्मीद करता हूं मेरे द्वारा लिखित रचनाएं आपको अवश्य पसंद आएंगी आप सभी पाठकों का और प्रेम आशीर्वाद सदैव मिलता रहे बहुत-बहुत धन्यवाद 🙏

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