(गीता प्रकाशन द्वारा प्रकाशित साझा संकलन "यादगार शब्दों का सफर")
सूरज की किरणों ने, जब धरती का किया श्रृंगार।
झूम उठी सागर की लहरें,जीवन में आई बहार।
1 पक्षी गाकर गीत मनोहर,सोये जन को जगाते हैं।
बागों की खिलती कलियां, धरती की मांग सजाते हैं।
सुनकर बच्चों की किलकारी, मां बहाती प्रेम की धार।
सूरज की किरणों ने ,जब धरती का किया श्रृंगार।
2 श्रम का सिपाही हल को लेकर, खेतों में बीज बरसाया।
गाकर मेघ मल्हार मन से, मिट्टी को सोना बनाया।
झूम उठी जीवों का तन मन,पाकर नया उपहार।
सूरज की किरणों ने, जब धरती का किया श्रृंगार।
3 मंदिर मस्जिद गिरजाघर में,हो रही है आरती।
राग द्वेष भूलकर सारे,कह रहे हैं हमारी भारती ।
मिट गये हैं मजहब की दूरी,पाकर सबका प्यार ।
सूरज की किरणों ने जब धरती का किया श्रृंगार।
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© चन्द्रहास सेन
शिक्षक ग्राम व पोस्ट कोसरंगी,
थाना खरोरा, जिला, रायपुर
छत्तीसगढ़
पिन 493225
मो, 9752468692
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