(गीता प्रकाशन द्वारा प्रकाशित "यादगार शब्दों का सफर" साझा संकलन से)
सारा जग ओम से ध्वनित है, सब जगह ओम सुनाई देता!
पृथ्वी,आकाश, समन्दर भी तो,बस ओम ओम चिल्लाता!!
मंदिर का प्रांगण घंटे से ध्वनित, मस्जिद भी नमाज से है!
पल पल ध्वनि बदलती रहती है, यह तो हर समाज से है!
कहीं नाकारात्मक तो कहीं सकारात्मक भी गूंज उठती है!
हर कोई यहाँ ध्वनित हुआ है, ध्वनि कहाँ कभी मिटती है!
यहाँ हर जीव ध्वनिमय है, यहाँ हर कोई कुछ चिल्लाता!!1!!
सारा जग ओम से ध्वनित,..................................!
जो जन्मा इस ब्रह्मांड में, हर कोई ध्वनि उत्पन्न करता!
ओम ध्वनि ही है ऐसी जिससे यह जीवन उत्पन्न करता!
ध्वनि जीवन है, ध्वनि पावन,ध्वनि बिन सब कुछ सूना!
ध्वनि जीवन का मधुर यंत्र है, इसके बिन कैसे है जीना!
सब कुछ ध्वनि से आच्छादित,ये ध्वनि ध्वनि चिल्लाता!!2!!
सारा जग ओम से ध्वनित,................................!
गायत्री महा मंत्र है, जिससे केवल ओम ध्वनि निकलती!
पूरा ब्रह्मांड इससे ध्वनित है, मन से भी ध्वनि निकलती!
ध्वनि का खेल निराला,यहाँ तरह तरह की ध्वनि निकले!
जहाँ देखो वहाँ ध्वनि है, मन से बस वाह वाह ही निकले!
मन से ध्वनि, ध्वनि से मन, जगत ओम ओम चिल्लाता!!3!!
सारा जग ओम से ध्वनित है, सब जगह ओम सुनाई देता!
पृथ्वी,आकाश समंदर भी तो, बस ओम ओम चिल्लाता!!
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राजपत्रित अधिकारी स्वास्थ्य विभाग,
उत्तर प्रदेश, कानपुर 208021.
Mo- 8318990927,9450323764
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