(DESH BHAKTI)
भारतीय संस्कृति
मीठी नदियों के मेल से, खारे सागर की शोभा बढ़ती है ।
भिन्न-भिन्न धर्मों के मेल से,भरत संसकृति की सुन्दरता निखरती है ।।
दिल्ली के छोले भटूरे हो या हैदराबाद की बिरयानी ,
आगरे का मीठा पेठा हो या, हरियाणा की मीठी जलेबी ।
ऐसी मिठास हमको क्या, पूर्ण भारत को भाती है ।
विभिन्नता की एकता लिये, सुख की बंसी बजाती है ।।
मस्ज़िद की दीवार हो या मन्दिर का द्वार ,
इसे मधुर बनाते है , हर जन शिल्पकार ।
ये महानता है मेरे माटी की, जिसका माथा हम सभी चूमे ,
न भेद भाव है न जातिवाद,आओ मिलकर हम सभी झूमें ।
ऐसी स्वर्ण अमृत सी सभ्यता,गर मिल जाये तुम्हे कहीं ,
बाँध लाओ उसे अपनी संस्कृति से, छूट जाये न वो कहीं ।
मीठी नदियों के मेल से , खारे सागर की शोभा बढ़ती है ।
भिन्न-भिन्न धर्मों के मेल से ,
भरत संस्कृति की सुन्दरता छलकती।
एम डी अख्तर पाषा
व्यवस्थापक अध्यक्ष,
हिंदी अध्यापक मंच(हम),
तेलंगाना।
9441302914
akhtarpashaham@gmail.com
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