(Mein Kavita ...)
जनता है लाचारी में
सड़कों पर है शोर बहुत,
पहरेदारी जोर बहुत।
लगा रहे आना जाना,
कगलीधारी मोर बहुत।
सैलाबों सा है इन्सां ,
छोटी सी गलियारी में ।
पेट पीठ से सटी हुई,
जनता है लाचारी में ।
लटके चारो ओर यहां,
पोस्टर है नेताओं के ।
और दबंगी जाल यहां ,
वोटों के क्रेताओं के ।
वेवस है मजदूर यहां ,
मेहनतकश बेकारी में।
जयकारों से मिली मजदूरी
अटती कब है थारी में।
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GEETA PRAKASHAN
Hyderabad
6281822363
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