(Mein Kavita ...)
दूर गगन की छांव में
दूर गगन की छांव में...
और मैं समंदर के किनारे...
शाम ढलने को थी...
मैं अकेला ही था...
समंदर शोर मचा रहा था...
आसमान में चांद था...
चांद पर कोई दाग़ ना था...
दूध सी सफेदी थी...
चांद की चांदनी...
लहरें...
मानों के एक के पीछे एक...
चांदनी को साहील तक पहुंचा रही थी...
चांदनी को जितनी बार मैं...
अपनी हथेली पर लेना चाहता...
हाथ से फिसल जाती...
निसर्ग का नजारा इतना हसीन था...
कैमरा में मैंने कैद कर लिया।
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GEETA PRAKASHAN
Hyderabad
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