Friday, July 8

कविता हूं अक्षरों का फ़ूल माला हूं - फ़रज़ाना (काव्य धारा)

काव्य धारा


कविता हूं अक्षरों का फ़ूल माला हूं

कवि और कवित्री कि मन की बात हूं

कविता हूं मैं  दिल और दिमाग़ की कल्पना हूं

बिना बात किए कलम से दुनिया को देखती हूं

कई अंजान लोगों को अपना बनाती हूं

किसी कि दिल की बात हूं

किसी के जन्मों का राज़ हूं

किसी की रुह कि इबादत हूं  

कविता हूं   कवियों की शान हूं

कलम की मुलाकात ‌से पन्नों में अक्षरों की धारा हूं 

प्रकृति की हर चीज पर लिखी जाती हूं

समाज कि भलाई पर लिखी जाती हूं

हर इंसान की ज़ुबान से 

वाह, वाह कि शाबाशियां लेती हूं,

कविता हूं सब से पढ़ी जाती हूं,

खुशनसीब हूं , खुश नज़रिया हूं 

बिना मेरे साहित्य हि अधूरा

मधुर पंक्तियां मेरी महान कवियों के 

कलम  द्वारा कर देती है साहित्य को पूरा 

कविता हूं अक्षरों का फ़ूल माला हूं

कवि और कवित्री कि मन की बात हूं 

कविता हूं, साहित्य कि पहचान हूं।

 

फ़रज़ाना

हिन्दी अध्यापिका

नलगोंडा

तेलंगाणा ।

94403 96378

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