Wednesday, July 6

गाँव का किसान - पार्वती भगवानराव देशपांडे (काव्य धारा)

काव्य धारा


गाँव का किसान 

गाँव का किसान 

सबसे प्यारासबसे न्यारा 

यहाँ हर कोई अपना

हम  गए तो  हमारा

आप गए तो आपका

किसान! तू अन्नदाता

मिट्टी के कण-कण में बसता

सोने की फसल उगाता

सर्दी ,बारिश,गर्मी से लड़ता|


तू तो देश के अर्थव्यवस्था का मेरुदंड

तेरी  ही झोली खाली

तू ही सब सुख - सुविधाओं से वंचित|


स्वार्थछलकपट से तू  कोसों दूर

तुझे भविष्य की चिंता

तू तो वर्त्तमान में जीता

आशावादी मन रखता


तू सबकी प्रेरणा

तू ईश्वर का प्रतिरूप 

तू कर्म का पुजारी

तू माता -पिता|


तेरे ही परिश्रम पर सारा संसार तृप्त है,

मत ख़त्म कर अपने  आप को

तेरे बिना संसार अनाथ है |



 

पार्वती भगवानराव देशपांडे

सहायक प्राध्यापिका

कस्तूरबा गाँधी डिग्री एंड पीजी कॉलेज 

सिकंदराबाद  

98499 49440 

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