भारतीय साहित्य विविध स्वर
आंसू
कोई न जाने कब आते हैं, आंसू-----
मुस्कुराने पर आते हैं
मुश्किलों में आते हैं
किसी के यादों में आते हैं
किसी की डांट पर आते हैं
खुशियां सुनने पर आते हैं
खुशियां मिलने पर आते हैं
किसी के धोखे में आते हैं
किसी की तारीफ़ में आते हैं
आंखों को दर्द हो ने पर आते हैं
दिल की तकलीफ़ में आते हैं
हल्के से झलक जाते हैं आंसू,
पर बहते हैं ,भारी मन से
दुनिया में हर चीज़ को पकड़ सकते हैं,
पर पकड़ नहीं सकते आंसू।
एक आंख दूसरी आंख को,
देख नहीं सकती फिर भी,
मिलकर बहते हैं आंसू,
कोई न जने कब आते हैं ये आंसू---।
फ़रज़ाना
M A(Hindi)
हिंदी अध्यापिका
नलगोंडा (ज़िला)
तेलंगाना।
94403 96378
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