भारतीय साहित्य विविध स्वर
दर्पण
हे दर्पण, अंदर का रूप भी दिखाओ।
असलियत को पहचानो।
बाह्य का रूप बहुत सुंदर,
अंदर का रूप भी दिखाओ!
बाह्य बहुत संतोष,
अंदर का भाव भी दिखाओ!
बाह्य देने वाला,
अंदर लेने वाला
इनके गुण भी दिखाओ!
बाहर से दुःखी,
असल में खुशी
इनके नाटक भी दिखाओ!
न्याय बोलने वाला भी
अन्याय से सोच रहा है।
इनकी सोच भी दिखाओ!
असत्य को सत्य,
अधर्म को धर्म
निरूपित करने वालों का
खेल भी दिखाओ!
इन कलाकारों के वजह से,
विश्व अधर्म मार्ग में जा रहा है।
हे दर्पण! इन कलाकारों की असलियत भी दिखाओ!
विश्व को बचाओ!
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