भारतीय साहित्य विविध स्वर
रक्षा बंधन
बहना मेरी तू ,आँखों का तारा,
तू ही मेरे जीने का सहारा,
तुझ बिन सूना, ये जग सारा,
तू ही मेरे खुशियों का किनारा I
हर दम तेरा साया बनकर,
रहूँ तुझ संग मैं, जीवन भर,
हरलूंगा मैं, तेरी हर पीड़ा,
तेरी रक्षा का, उठाया बीड़ा I
जीवन का वरदान तू बहना,
सच है ये तू , मान ले कहना,
तुझ बिन मेरी थी, सूनी कलाई,
तूने आकर, राखी सजाई I
तुझ से चलती, साँसे मेरी,
तू ही खुशियों की है ढ़ेरी,
तेरी राखी,लगती ऐसी,
विष्णु सुदर्शन चकरी जैसी I
तू ही अंबर, तू ही सागर,
तू ही है मेरी अमृत गागर,
तेरी परछाई, आँखों में भरकर,
स्वर्ग का अनुभव, करूँ जीवन भर I
तस्लीम फातिमा
हिन्दी पंडित,
ZPHS खिलाशाहपूर,
रघुनाथपल्ली, जनगांव
506244
99663 42656
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