Sunday, July 31

रक्षा बंधन - तस्लीम फातिमा (भारतीय साहित्य विविध स्वर)

 भारतीय साहित्य विविध स्वर

 


रक्षा बंधन

                                                                 

बहना मेरी तू ,आँखों का तारा, 

तू ही मेरे जीने का सहारा, 

तुझ बिन सूना, ये जग सारा, 

तू ही मेरे खुशियों का किनारा I 

        

     हर दम तेरा साया बनकर, 

     रहूँ तुझ संग मैं, जीवन भर,

     हरलूंगा मैं, तेरी हर पीड़ा,

     तेरी रक्षा का, उठाया बीड़ा I 


जीवन का वरदान तू बहना, 

सच है ये तू , मान ले कहना,

तुझ बिन मेरी थी, सूनी कलाई,

तूने आकर,  राखी सजाई I 


     तुझ से चलती, साँसे मेरी,

     तू ही खुशियों की है ढ़ेरी,

     तेरी राखी,लगती ऐसी,

    विष्णु सुदर्शन चकरी जैसी I 


तू ही अंबर, तू ही सागर, 

तू ही है मेरी अमृत गागर, 

तेरी परछाई, आँखों में भरकर, 

स्वर्ग का अनुभव, करूँ  जीवन भर I 


   

तस्लीम फातिमा  

हिन्दी पंडित,

ZPHS खिलाशाहपूर,

रघुनाथपल्ली, जनगांव

506244


99663 42656

-------------------------------------------------------------------------------------

Call 9849250784 for more details on Book. 

-----------------------------------------------------------------------------------------------------


scan to see on youtube



scan to join on WhatsApp




BOOK PUBLISHED BY :

GEETA PRAKASHAN

INDIA

Cell 98492 50784

geetaprakashan7@gmail.com

---------------------------------------------------------------------------------

do you want to publish your writing through our BLOGPAGE ?

Please call us 62818 22363

No comments:

Post a Comment

हमर छत्तीसगढ़ - मुकेश कुमार भारद्वाज (Geeta Prakashan Bookswala's Anthology "उथल पुथल - अक्षरों की")

(Geeta Prakashan Bookswala's Anthology "उथल पुथल - अक्षरों की")      हमर छत्तीसगढ़  💐..................................💐 छत्त...