काव्य धारा

हम अपने ज्ञान की ज्योति से,
हर बच्चे के मन में ज्ञान का दीप जलाते हैं|
जो बच्चों को पाठ पढ़ा कर उनका भविष्य उज्जवल बनाते हैं |
वे राष्ट्र निर्माता कहलाते हैं |
जात-पात से ऊपर उठकर,
ईमानदारी, त्याग और सहनशीलता सिखाते हैं|
शिक्षक से ही है अर्जुन और युधिष्ठिर
शिक्षक से ही अब्दुल कलाम और भगत सिंह
है |
नवीन तकनीकियों को जानने के लिए नित
विद्यार्थी हम बन जाते हैं|
जीवन के इस भाग दौड़ में समय से हम
लड़ते हैं |
विद्यार्थी और शिक्षक नदियों के दो पाट हैं
|
जो रहते अलग-अलग है पर चलते साथ साथ हैं |
जीवन को विकसित करने के लिए ज्ञान जरूरी
है |
शिक्षक के बिना यह जिंदगी अधूरी है |
अपने शिक्षक होने का हम अभिमान करते
हैं |
सभी गुरुजनों को कोटि-कोटि वंदन करते
हैं |
भवानी संतोषीबाई
9248888354
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