Tuesday, July 5

ज्ञान की ज्योति - भवानी संतोषीबाई (काव्य धारा)

काव्य धारा


ज्ञान की ज्योति

हम अपने ज्ञान की ज्योति से,

हर बच्चे के मन में ज्ञान का दीप जलाते हैं|

 

जो बच्चों को पाठ पढ़ा कर उनका भविष्य उज्जवल बनाते हैं |

वे राष्ट्र निर्माता कहलाते हैं |

 

जात-पात से ऊपर उठकर,

ईमानदारीत्याग और सहनशीलता सिखाते हैं|

 

शिक्षक से ही है अर्जुन और युधिष्ठिर

शिक्षक से ही अब्दुल कलाम और भगत सिंह है |

 

नवीन तकनीकियों को जानने के लिए नित विद्यार्थी हम बन जाते हैं|

जीवन के इस भाग दौड़ में समय से हम लड़ते हैं |

 

विद्यार्थी और शिक्षक नदियों के दो पाट हैं |

जो रहते अलग-अलग है पर चलते साथ साथ हैं |

 

जीवन को विकसित करने के लिए ज्ञान जरूरी है |

शिक्षक के बिना यह जिंदगी अधूरी है |

 

अपने शिक्षक होने का हम अभिमान करते हैं |

सभी गुरुजनों को कोटि-कोटि वंदन करते हैं |




भवानी संतोषीबाई

9248888354

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