काव्य धारा

वह जहां भी जाती
अपनी खुशबू साथ ले जाती,
ऐसी ही है एक लड़की जो हैं फूल की तरह
नाम पूर्णिमा।
अपना स्वार्थ ना देखकर करती है दूसरों की मदद फिर भी
मिलती है उसे प्रशंसा के बदले बदनामी,
मगर नहीं छोड़ती वह अपना स्वभाव
लेकर चलती साथ में है सबको।।
जीती है दूसरों की खुशी के लिए
अपने स्वार्थ को भूलकर,
फिर भी कोई नहीं करता कदर
इस लड़की का जो फूल जैसी मासूम हैं।
सोचती दिन भर अपने माता-पिता के बारे में
करती उनकी पूजा बड़े दिलोजान से,
देना चाहती है उन्हें प्यार, सम्मान और अच्छा जीवन
सब जो वे चाहते हैं।।
करती है सब अपने मन से होगी कामयाब एक दिन वो,
करेगी साकार अपने सपनों को खुद ढूंढकर रास्ता
अपनी पाएगी मंजिल एक दिन।
मेहनती है, लगन है, जुनून है, जीतने का जज्बा है,
उम्मीद है कठिनाइयां आने पर भी हौसले से काम लेती है
ये लड़की पूर्णिमा।
इसलिए कहते हैं सब “एक कली मुस्कान होती है लड़कियां”
हारती नहीं है वह अपने जीवन में कभी भी,
होगी कामयाब एक दिन जरूर अपने जीवन में
ऐसी ही है ये पूर्णिमा
जो होती हैं पूर्ण, फूल की तरह है और होती है वह निराली।।
पुष्पा
70131 42190
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