काव्य धारा

कोई और नहीं ‘कविता’ हूँ,मैं,
एक सत्य हूँ,एक शिवम् हूँ,मैं
एक सुंदरम् हूँ, मैं
सत्यम्, शिवम्, सुंदरम् की
भावनाओं से मंजी हुई सूरत हूँ, मैं।
कोई और नहीं ‘कविता ’ हूँ,मैं ।
इक रस हूँ, मैं
इक छंद हूँ, मैं
इक अलंकार हूँ, मैं
इक रीति हूँ, मैं
इक वक्रोक्ति हूँ , मैं
इक औचित्य हूँ , मैं
इक ध्वनि हूँ, मैं
अनादि हूँ, अनंत हूँ, अखण्ड हूँ , कलामय हूँ, मैं
अनुनादित हूँ, विराट-व्योम में, चराचर में,
भाव विभोर की दौलत हूँ मैं,
कोई और नहीं ‘कविता ’ हूँ, मैं।
स्रष्टा के रंगों की रंगत हूँ, मैं ।
कवि के मानस की राज-हंसिनी हूँ, मैं ।
कवि का अनुगीत सुनाती हूँ, मैं।
कोई और नहीं ‘कविता’ हूँ, मैं।
काव्य-आँगन में जो किलकारियाँ भर दें ,
नवरस का वह स्वर हूँ, मैं।
कवि-ज़िन्दगी की जन्नत हूँ, मैं।
कोई और नहीं ‘कविता’ हूँ , मैं।
भाव पक्ष और कला पक्ष के मिलन की बेला हूँ, मैं।
ऊषा हूँ मैं,संध्या हूँ, मैं।
समाज की सेज पर संचित प्रतिबिंबित हूँ, मैं।
कोई और नहीं कविता हूँ मैं।
भाषा पंडित (हिन्दी)
ज़िला परिषद हाई स्कूल, गोवर्द्धनगिरि।
रघुनाथपल्ली (मंडल)
जनगाँव ज़िला ।
99859 00746


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