Sunday, July 3

खिचड़ी - डॉ. मोहम्मद शाहीद (काव्य धारा)

 काव्य धारा


खिचड़ी


एक नया राज्य हुआ सम्पन्न
नये राज्य का नया राजा हुआ चयन
प्रजा को देनी थी दावत एक दिन
खिचड़ी खिलाने का किया ऐलान।

मंगवाए दाल  और चावल 
दोनों का किया मिलन
थे उनमें वेश बदलकर
कुछ सफेद कुछ पीले कंकड़
कर दिया पकवान का हनन,,,

निंदा डाली चावल और दाल 
दोनो एक दूजे पर
चावल के दल ने कहा 
 हम तो पाक है
लगता है दाल में ही कुछ काला है।
दाल के दल ने कहा 
तू सफेद हो तो क्या हुआ
साथ मे कंकड़ भी तो लाया है।

हर दिन बिगड़ती खिचड़ी
बनते बनते युग बीते
बने नये - नये राजा
कभी चावल का नेता 
तो कभी दाल का

बना  राजा किसी भी दल का
खिचड़ी कभी न बन पाई।
दाल और  चावल की 
 भिडंत बढ़ती गई
मान लिया एक दूजे को दुश्मन
अपने अपने दल से कट्टर निकले
कहा शत्रु को हटाओ 
खिचड़ी बनाओ


कंकड़ वेश बदले 
बनते चले  गये राजा
बने स्वार्थी
खीचड़ी कभी न दी बनने 
कुछ देते बयान , 
कुछ करवाते दंगे फसाद
उठाकर फायदा 
  वेश बदले कंकड़
 बन जाते राजा।

कई ...राजा बने 
कभी न बन पाई खिचड़ी...
फिर एक दिन
चावल और दाल को आया ख़याल
क्यों नही बन पाती खिचड़ी

जाग उठा बुद्दिजीवी एक दिन
किया ऐलान
चावल और दाल को दिया सुझाव
ढूँढ़कर निकालो 
अपने अंदर छिपे कंकड़ को।


पहचाना खुद के दल में छिपे 
बहरूपिये को
किया अलग उनको
दूर भगाया वेश बदले कंकड़  को

बनाया दल नया
मीले
दाल और चावल
बनी खिचड़ी 
खायी प्रजा



डॉ. मोहम्मद शाहीद
9542766884
-------------------------------------------------------------------------------------


Call us on 9849250784
To join us,,,

No comments:

Post a Comment

हमर छत्तीसगढ़ - मुकेश कुमार भारद्वाज (Geeta Prakashan Bookswala's Anthology "उथल पुथल - अक्षरों की")

(Geeta Prakashan Bookswala's Anthology "उथल पुथल - अक्षरों की")      हमर छत्तीसगढ़  💐..................................💐 छत्त...