काव्य धारा

बेटियां
बेटियां घर की शान है।
वह आज के समय की पहचान है।
जमाने के साथ उसे सम्मान भी मिला है
तथा उसके रूपों की बात भी चल गई है।
लेकिन घर तथा बाहर
उसे देखने का नजरिया बदल गया है।
एक जमाना था उसे पूजा जाता था।
एक जमाना था उसे देखने की वस्तु के रूप में देखा गया था।
एक जमाने में वह मार्गदर्शक बन कर सामने आयी
तो एक जमाने में वह युद्ध का कारण बन कर आयी थी।
अब छोड़ो पीछली बातें बेटी वह बेटी नहीं रही
वह तो देश की शान बन गयी है।
हर मुकाम पर वह ठहर चुकी हैं ।
ना वह किसी की बोझ बन रही है
वह तो आज बोझ को ढोने का काम करने
लगी है।
उसका न कोई क्षेत्र छुट चुका है
न वह आज अपने को कमजोर समझने लगी है
वह तो सभी क्षेत्रों को छु चुकी हैं वह तो हमारी बेटी हैं।
डॉ नीता द भोसले
प्राचार्य सरकारी प्रथम श्रेणी महाविद्यालय
कमलापुर जिला कलबुरगि
राज्य कर्नाटक
9901361333
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