Saturday, July 2

सेवा का व्रत - अंजू आर पाण्डेय (काव्य धारा)

काव्य धारा


सेवा का व्रत
               
सेवा का व्रत लेकर हमको, आगे- आगे बढ़ते जाना,
जीवन का उद्देश्य यही हो, घर- घर ऐसा अलख जगाना।

सेवा का व्रत...................

गांव- गांव और बस्ती- बस्ती, झूमे अंबर, झूमे धरती,
स्वाभिमान से शीश उठाकर, जीना सबको है सिखलाना।
सेवा का व्रत...................

सभी सुखी हों, सभी निरोगी, यही कामना है हम सबकी,
राष्ट्रप्रेम का भाव जगा कर, हर घर को आदर्श बनाना।

सेवा का व्रत.....................

दया धर्म और प्रेम बढ़ाकर, चलें कदम से कदम मिलाकर,
सब समान हों सब महान हों, ऐसा समरस भाव जगाना।

सेवा का व्रत...................

संस्कारों से पोषित हों सब, सुविधा पहुंचे हर जन-जन तक,
सेवित भी सहयोगी बनकर, करें राष्ट्र आ..रा.ध..ना।

सेवा का व्रत.................

चंदन की है, वंदन की है, यह धरती रघुनंदन की है,
ऐसी पुण्य धरा को फिर से, विश्व गुरु तक है पहुंचाना।

सेवा का व्रत................


अंजू आर पाण्डेय
लेखिका
दिल्ली
6281 379 595

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