भारतीय साहित्य विविध स्वर
हिंदी है देश की पहचान,
भारत है देश महान।
हिंदी न मुसलमान है,न हिंदू है।
हिंदी न ईसाई है,न सिख।
हिंदी न जैन,न बौद्ध न पारसी।
हिंदी भारतीय है, हिंदी भारतीय है।
हिंदी जायसी की पद्मावत है,
तुलसी की रामचरित मानस है।
हिंदी सूर की सूर सागर है,कबीर की बीजक है।
हिंदी भारतीय है, हिंदी भारतीय है।
हिंदी पंत की चिदम्बरा है, प्रसाद की कामायनी है।
हिंदी निराला की सरोज स्मृति है, प्रेमचंद की कर्मभूमि है।
हिंदी भारतीय है, हिंदी भारतीय है।
हिंदी दिनकर की उर्वशी है, यशपाल की दिव्या है।
हिंदी बच्चन की निशा निमंत्रण है, महादेवी वर्मा की यामा है।
हिंदी भारतीय है, हिंदी भारतीय है।
हिंदी हिन्दुस्थानियों की भाषा है,
भारतीयों की आशा है।


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