काव्य धारा

कविता, हे कविता !
कविता,हे कविता !
न गगन कुसुम,
न जगत् मिथ्या,
न प्रलय विलय,
न अस्मिता की
तलाश,
न ईर्ष्या की
जलन,
सुस्मिता का
विलास –जिजीविषा|
कविता, हे कविता!
आकाश का अनंत,
पृथ्वी का सहन,
पानी की तरलता,
मलय का मारुत,
सूर्य का तेज,
सुमन का सुगंध– सुधामृत|
कविता, हे कविता!
न विस्मय – न असमय,
न विपरीत – न अपरिचित,
न विरोध – न अवरोध,
न विभेद – न अभेद,
न विपर्याय – न अकर्मण्य,
प्रगतिशील प्रभास – विजय सुहास (विहार)|
कविता, हे कविता !
मेरे ह्रदय की धड़कन,
मन की चाह,
मस्तिष्क की आकांक्षा,
धैर्य की लक्ष्मी, विजय की कामना,
विशब्द,अस्तब्ध - जीव की यात्रा|
ए . सांबशिव राव
हिंदी के सहाय आचार्य,
हिंदी विभाग,
एस. आर. & बी. जी.
एन. आर आर्ट्स & साइंस कॉलेज (स्वायत्तशासी),
खम्मम, तेलंगाणा स्टेट –
507 002
99089 22678
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