(Bharat Ki Azadi Ka Amruth Mahotsav)
यादें और वादे
यादें और वादे
समय से जुड़े हैं ।
यादें पुराने वादे याददाश्त से निकल जाते हैं ।
कभी ख्वाबों में खो जाते हैं ।
तो कभी हकीकत में बदल जाते हैं।
लोगों के पास समय न रहा सोचने के लिए ।
समय के हेरफेर में सब भूल जाते हैं।
संसार के बंधन में जकड़ कर कुछ याद ना रहा
बस यादों का तार रह गया जीवन में ।
पुराने वक्त के बारे में सुनते ही यादों का तार जुड़ जाता है।
यादें और वादे तरोताजा बन जाते हैं।
गहराई तक चला जाता है मन ।
समय तो निकल जाता है।
मन खयालों में
डुबकियां लगा कर
वापस आ जाता है।
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