Thursday, July 21

यादें और वादे - सुजाता राव (Bharat Ki Azadi Ka Amruth Mahotsav)

 (Bharat Ki Azadi Ka Amruth Mahotsav)


यादें और वादे

यादें और वादे 
समय से जुड़े हैं ।
यादें पुराने वादे याददाश्त  से निकल जाते हैं ।
कभी ख्वाबों में खो जाते हैं ।
तो कभी हकीकत में बदल जाते हैं। 
लोगों के पास समय न रहा सोचने के लिए ।
समय के हेरफेर में सब भूल जाते हैं।
संसार के बंधन में जकड़ कर कुछ याद  ना रहा 
बस यादों का तार रह गया जीवन में । 
पुराने वक्त के बारे में सुनते ही यादों का तार जुड़ जाता है।
 यादें और वादे तरोताजा बन जाते हैं।
 गहराई तक चला जाता है मन ।
समय तो निकल जाता है।
 मन खयालों में 
डुबकियां लगा कर 
वापस आ जाता है।


सुजाता राव 

पीजीटी हिंदी

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