काव्य धारा

हमे है प्यारी आजादी
नही करेंगे इसकी बर्बादी,
इसे दिलाने के लिए
नेताओं ने जाँ लुटा दी
नहीं हटेंगे, नही हटेंगे,
पथ से अपने हम नहीं हटेंगे,
यूँ ही पथ पर डटे रहेंगे
सौ - सौ चाहे गम सहेंगे
फ़ौलादों का सीना अपना
बाहें है तलवार सी
अब न गाँधी जवाहर है
यादें उनकी अपार है
सर पर लटके चाहे तलवार हो
दुश्मन हमारे पार हो
लगे चाहें लाशों की कतार हो
अब ना किसी की परवाह हो
हमें दिलाने के लिए इसे
नेताओं ने जाँ लुटा दी
नहीं हटेंगे, नही हटेंगे,
पथ से अपने हम नहीं हटेंगे,
यूँ ही पथ पर डटे रहेंगे
सौ - सौ चाहे गम सहेंगे
नही हिले है नही हिलेंगे
हम सब मिलकर साथ चलेंगे
जोश दिये के दिल में जलेंगे
मरते दम तक यूँ ही चलेंगे
खायी कई गोलियां इस सीने में
आता है मज़ा अब जीने में
खुद को ही हम खो देंगे
औरों के लिए हम जाँ देंगे
चाह नही अब चाह नही
गुलामी की अब चाह नहीं
लेंगे किसी की आह नहीं
आजादी बिना जीने की अब चाह नही..
सर पर अपने बांधें कफन
अरमां करने चले दफन
बचाले अपने भाई- बहन
ऐसा ना हो बंदी फिर कोई वतन......
Bairam Rajmani
6300064910


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