भारतीय साहित्य विविध स्वर
अमीरों की शादी है
खाना तो अच्छा वाला होगा
खूब सारे पकवान होंगे
सूट-बूट में गाड़ीवाले
चमकते चेहरे लिये
थोड़े-कुछ मेहमान होंगे
कुछ खायेंगे
प्लेटों में भर-भर
थोड़ा-कम चक कर
ज्यादा कचरे में फैकेंगे
चाहे बाहर कोई खड़ा
भोजन को गुहार रहा
थोड़ा मिल जाये
ऐसी आश में निहार रहा
भोजन का पता नहीं
खाने में धूतकार मिली
भूखा था, भूखा गया
गाली ऊपर से चार मिली
अमीरों की शादी है
खाना तो फैका जायेगा
भूखा जाने वाला जाये
खाना बर्बाद भले हो
किसी भूखे-लाचार को
खाना थोड़े रखा जायेगा।
अनिल कुमार
वरिष्ठ अध्यापक हिन्दी
ग्राम देई, जिला बूंदी,
राजस्थान
96368 87773
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