Saturday, July 2

राम भक्त हनुमान - पी. सुधारानी (काव्य धारा)

काव्य धारा


राम भक्त हनुमान 
               
हो सिद्धि हनुमदाश्रित से 
राम भक्त हनुमान की भक्त हैं मध्य,
 समुद्रलंघन वज्रबल संपन्न की भक्त हैं मध्य,
त्रेता द्वापर और कलियुग में अंजनीसुत का भक्त,
राम रावण युद्ध में लिया वीरमरण।
द्वापर के कुरुक्षेत्र युद्ध में लिया हिस्सा,
अर्जुन रथ के झंडा पर कपिवर देख
किया पूर्व जन्म स्मरण और वीरगति ।
फिर लिया जन्म कलियुग में यर्रकालुवा तट पर
बनाया कुटीर, तप के समय जल में गिरने से बचाया बंदर,
रोज़ आकर खिलाया केला मध्य पहचान लिया हनुमान रूप।
मांगा वर सदा साथ रहने का
पाया वर गुरुवाईगूडा में बना अर्जुन वृक्ष। 
कलियुग ब्रह्म केसरी सुत हुआ स्वयंभू अर्जुन वृक्ष मूल,
 दक्षिण हस्त गदा वामास्त में केला और बढ़ते कदम,
अभय प्रसाद गदा, फलप्रद केला और बढ़ते कदम तत्क्षण अनुग्रह।
सफेद अर्जुन वृक्ष ही शिखर, पांच शिर शेष अर्जुन तना,
यह मूर्ति भक्तों के कल्याणकारी शत्रु संहारी और इष्ट कार्य सिद्धि कारी।
पावे यह पावन चरित्र गर्गसंहिता रामायण और पद्मपुराण में,
हनुमान भक्त मध्य राम भक्त हनुमान की आराधना से प्राप्त किया अनुग्रह,
हनुमदाश्रित से हो सिद्धि, सर्व देव कृपादृष्टि ।
हें! कदली वन विहारी गंधमाधन वासी सर्वलोकैक नाथाय मंगलं जय मंगलं


पी. सुधारानी
शोधार्थी
उस्मानिया विश्वविद्यालय
हैदराबाद
6281 379 595

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