Saturday, May 21

आजकल की नारी हूंँ - सुनीता प्रयाकर राव (काव्य धारा)

काव्य धारा




आजकल की नारी हूंँ

सुनीता प्रयाकर राव



 नारी हूँ , 

मैं नारी हूँ,  

आजकल की नारी हूंँ l

मैं अंबर हूंँ,  

मैं सितारा हूंँ,  

मैं ही चांँद, 

तारें जैसे रोशनी हूंँ l

मैं धरती हूँ, 

मैं नज़ारा  हूंँ,         

मैं ही जल गंगाजल की पवित्र धारा हूंँ l

मैं हवा हूंँ,  

मैं फिजा हूंँ, 

मैं ही शीतल मौसम का इशारा हूंँ l

नारी हूंँ मैं, 

नारी हूंँ,  

आजकल की नारी हूंँ  l

नारी हूँ,  

नारायणी हूंँ मैं, 

ममता रूपी महासागर हूंँ l

शक्ति का ही दिया हुआ, 

शांति का ही एक रूप ही हूंँ l

शीतल छाया की  आशा हूँ मैं, 

मनोहर प्रेमी की परिभाषा हूंँ  मैं l

प्रजा की सोई हुई अभिलाषा को, 

आशा रूपी दीपक से जगा सकती हूँ मैं l

नारी हूंँ, 

मैं नारी हूंँ, 

आजकल की नारी हूँ l

सुनीता प्रयाकर राव

    कलम का नाम : वासुनि, 

               करीमनगर, 

                तेलंगाना l

95535 99001

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काव्य धारा
Editor
Prasadarao Jami

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