काव्य धारा
- सुनीता प्रयाकर राव
नारी हूँ ,
मैं नारी हूँ,
आजकल की नारी हूंँ l
मैं अंबर हूंँ,
मैं सितारा हूंँ,
मैं ही चांँद,
तारें जैसे रोशनी हूंँ l
मैं धरती हूँ,
मैं नज़ारा हूंँ,
मैं ही जल गंगाजल की पवित्र धारा हूंँ l
मैं हवा हूंँ,
मैं फिजा हूंँ,
मैं ही शीतल मौसम का इशारा हूंँ l
नारी हूंँ मैं,
नारी हूंँ,
आजकल की नारी हूंँ l
नारी हूँ,
नारायणी हूंँ मैं,
ममता रूपी महासागर हूंँ l
शक्ति का ही दिया हुआ,
शांति का ही एक रूप ही हूंँ l
शीतल छाया की आशा हूँ मैं,
मनोहर प्रेमी की परिभाषा हूंँ मैं l
प्रजा की सोई हुई अभिलाषा को,
आशा रूपी दीपक से जगा सकती हूँ मैं l
नारी हूंँ,
मैं नारी हूंँ,
आजकल की नारी हूँ l
सुनीता प्रयाकर राव
कलम का नाम : वासुनि,
करीमनगर,
तेलंगाना l
95535 99001


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