काव्य धारा
- प्रवीण कुमार जामि
मेरा परिवार अनमोल खजाना है,
मेरा परिवार संस्कारों की खान है,
मेरा परिवार प्रेम का प्रतीक है,
मेरा परिवार खुशियों का फुलवारी है।
माता-पिता, भाई बहन,
दादा-दादी,नाना-नानी,
मामा-मामी,चाचा-चाची,
अटूट रिश्तोँ का अनोखा बंधन है।
मान-मर्यादा;ममता-ममता,
स्नेहबंधन; त्याग- समर्पण,
सुख-दुख; गम-खुशी,
अद्भुत स्वर्ग जैसा सुंदर उपवन है।
मधुर स्नेह; बंधु प्रीति,
आदर-सत्कार, लाड-प्यार,
तन-मन-धन न्योछावर,
मानव मूल्यों का वसुधैव कुटुंब है।
एकादशी; गणेश चतुर्थी,
होली-उगादि;दशहरा-दीपावली,
तीज-ईद,संक्रांति-ओणम,
मिलजुल खुशी-खुशी मनाते हैं।
प्रवीण कुमार जामि
युवा कवि
बीटेक मैकेनिकल इंजीनियर
( जेएनटीयू हैदराबाद)
तेलंगाना, भारत
7659074993


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