Monday, May 23

मेरा परिवार- प्रवीण कुमार जामि (काव्य धारा)

काव्य धारा


मेरा परिवार

- प्रवीण कुमार जामि 


मेरा परिवार अनमोल खजाना है,

मेरा परिवार संस्कारों की खान है,

मेरा परिवार प्रेम का प्रतीक है,

मेरा परिवार खुशियों का फुलवारी है।


माता-पिता, भाई बहन,

दादा-दादी,नाना-नानी,

मामा-मामी,चाचा-चाची,

अटूट रिश्तोँ का अनोखा बंधन है।


मान-मर्यादा;ममता-ममता,

स्नेहबंधन; त्याग- समर्पण,

सुख-दुख; गम-खुशी,

अद्भुत स्वर्ग जैसा सुंदर उपवन है।


मधुर स्नेह; बंधु प्रीति,

आदर-सत्कार, लाड-प्यार,

तन-मन-धन न्योछावर,

मानव मूल्यों का वसुधैव कुटुंब है।


एकादशी;  गणेश चतुर्थी,

होली-उगादि;दशहरा-दीपावली,

तीज-ईद,संक्रांति-ओणम,

मिलजुल खुशी-खुशी मनाते हैं।




प्रवीण कुमार जामि

युवा कवि

बीटेक मैकेनिकल इंजीनियर

( जेएनटीयू हैदराबाद)

तेलंगाना, भारत

7659074993

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