कथा सरोवर
बात उस समय की है जब एक बड़ी कंपनी में मैनेजर पद के लिए साक्षात्कार था। बहुत भीड़ थी ।अनेक लड़के, लड़कियां साक्षात्कार के लिए एकत्रित हुए थे ।उन्हीं में सुनीता और भास्कर नामक लड़की और लड़का भी आया था। सुनीता ने एमबीए किया था और वह भीड़भाड़ से हटकर बाहर लान में बैठ गई थी ।और साक्षात्कार के लिए अपनी बारी के आने का इंतजार कर रही थी ।उसी भीड़ में भास्कर भी अपनी बारी का इंतजार कर रहा था ।वह गरीब परिवार से था। वह भी बाहर अलग-थलग गुमसुम सा खड़ा था और अपनी बारी का इंतजार कर रहा था ।वह अपने हाथ में सभी दस्तावेज पकड़े हुए था ।उसी समय हवा चलने से हाथ में पकड़े हुए दस्तावेज भास्कर के हाथ से गिर गए और एक अति महत्वपूर्ण कागज उड़कर सुनीता के पैर के पास चला गया,भास्कर चिल्लाकर 'ओ मैडम' 'ओ मैडम' पकड़ो ।लेकिन सुनीता ने ध्यान नहीं दिया ।भास्कर दौड़ता हुआ आया और अपना दस्तावेज उठाया। फिर सुनीता की ओर मुखातिब होकर बोला ,आप मैनेजर पद के लिए साक्षात्कार देने आई हैं ,पर एक गरीब की मदद नहीं कर सकती ।आप अपने पद की गरिमा को कैसे बचा पाएँगी। यह सुनकर सुनीता रुआँसी हो गई और कुर्सी से उठकर अपने पीछे रखी हुई वैशाखी उठाकर चलने लगी। यह देख कर भास्कर को अपनी सोच पर शर्म महसूस हुई और उसे अपने कहे पर बहुत पछतावा हुआ और सुनीता से माफी मांगी ।
नैतिक शिक्षा---
बिना सोचे विचारे किसी का दिल दुखाने वाली बात नही कहना चाहिए।
-------------------------------------------------------------------------------------

No comments:
Post a Comment