कथा सरोवर
दोस्ती हो तो किताबों की, बाकी सब बेकार।
ज्ञान चक्षुओं की वह रातें ,करदे जीवन को साकार।।
जीवन एक संघर्ष है, रण क्षेत्र का मैदान।
जिसमें जो जीत ता, वही कहलाता महान।।
इंसान खुद को इग्नोर करें ,कैमरा को न पाए।
कलियुग की यही दशा, मानव मानव न पाए।।
कपडे न देखो लोगों के, कपड़ा में रखा न कुछ।
मन में जो सांचा होय,तो मिलयो बहुत कुछ ।।
काम तुम्हारा कठिन है ,बहुत कठिन अभिव्यक्ति।
बंद तिजोरी सा यहाँ ,दीखता है हर व्यक्ति।।
दूसरों की सुन मैं चला ,हासिल न हुआ कुछ।
जो सुन ली स्वयं दिल की ,पाया मैं सब कुछ।।
जगह ऐसी सराहिये ,जहाँ गन्दगी न होय।
साफ सफाई सीख लो ,और नाहीं उपाय।।
वो खून किस मतलब का,ज्यों उबाल नाम नहिं।
वो खून किस मतलब का,आ देश के काम नहिं।।
सजग नागरिक की तरह ,जाहिर हो अभिव्यक्ति ।
jawalkarramesh6@gmail.com
Highly appreciable work to encourage the writers from this desk.
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